हादसा होने का बजा सायरन, राहत दल ने तत्काल संभाला मोर्चा

रेलवे में संभावित दुर्घटनाओं से निपटने की तैयारियों को परखने व राहत-बचाव व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से शुक्रवार को झाझा रेलवे स्टेशन स्थित एनपी यार्ड में मॉक ड्रिल किया गया.
झाझा . रेलवे में संभावित दुर्घटनाओं से निपटने की तैयारियों को परखने व राहत-बचाव व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से शुक्रवार को झाझा रेलवे स्टेशन स्थित एनपी यार्ड में मॉक ड्रिल किया गया. यह कार्यक्रम दानापुर मंडल के एडीआरएम (इंफ्रास्ट्रक्चर) राजीव कुमार की उपस्थिति में दानापुर मंडल, एनडीआरएफ की नवमी बटालियन, बिहटा के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ. मॉक ड्रिल बोगी के डिरेल होने के बाद की स्थिति पर आधारित थी. दोपहर 12:36 बजे सायरन बजते ही कृत्रिम रूप से तैयार दुर्घटना स्थल पर राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया. रेलवे के राहत दल ने तुरंत मोर्चा संभाला और कंट्रोल रूम से एनडीआरएफ को सूचना दी गयी. सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीम सड़क मार्ग से घटनास्थल पर पहुंची और रेलवे कर्मियों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से राहत व बचाव अभियान चलाया.
तैयार किया गया डिरेलमेंट का काल्पनिक दृश्य
इस संयुक्त मॉक ड्रिल में एक यात्री ट्रेन के दो डिब्बों के डिरेल होने का काल्पनिक परिदृश्य बनाया गया, जिसमें छह यात्रियों को मामूली, तीन को गंभीर रूप से घायल तथा पांच यात्रियों को मृत दिखाया गया. घायलों को बोगी काटकर बाहर निकाला गया और मौके पर प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया गया. मृत यात्रियों से संबंधित औपचारिक प्रक्रियाओं का भी अभ्यास किया गया. इस अभ्यास में जिला प्रशासन, आरपीएफ, राजकीय रेल पुलिस, स्काउट एंड गाइड के साथ-साथ रेलवे के सभी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी सक्रिय रूप से शामिल रहे. बचाव कार्य के दौरान यात्रियों की सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सुविधा, सूचना संप्रेषण और समन्वय पर विशेष ध्यान दिया गया. एडीआरएम राजीव कुमार ने बताया कि इस तरह के मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य वास्तविक रेल दुर्घटना के समय अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रतिक्रिया, समन्वय और बचाव क्षमता का आकलन करना है. एनडीआरएफ, आरएएफ, आरपीएफ, जीआरपी, स्टेशन प्रबंधन, चिकित्सा, अभियंत्रण सहित सभी विभागों की सहभागिता से आपदा के समय त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है. उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल एक तरह की प्रैक्टिस है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी एजेंसियों को तैयार रखती है. इसी कारण रेलवे द्वारा समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. ऐसे कार्यक्रमों से रेलवे कर्मचारियों के अनुभव और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. उन्होंने कहा, “जितना अधिक पसीना बहाएंगे, उतना ही कम खून बहेगा. यानी दुर्घटनाएं कम होंगी और जानमाल की क्षति घटेगी.” उन्होंने कर्मचारियों से ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करने की अपील की.दुर्घटना के बाद लगे विभिन्न स्टॉल
मॉक ड्रिल के दौरान सूचना केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, बीमा केंद्र, मुआवजा केंद्र सहित कई स्टॉल लगाए गये थे. स्टेशन प्रबंधक रविकांत माथुरी ने बताया कि दुर्घटना के बाद की सभी प्रक्रियाओं के निष्पादन का अभ्यास इन स्टॉलों के माध्यम से किया गया. इस दौरान एनडीआरएफ बिहटा के संतोष कुमार, एसीएम प्रदीप कुमार, डीईई संजय कुमार, स्टेशन प्रबंधक रविकांत माथुरी, यातायात निरीक्षक रवि कुमार गुप्ता, एसडीपीओ राजेश कुमार, थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह, आरपीएफ पोस्ट कमांडर अनिता कुमारी, जीआरपी थानाध्यक्ष बृंद कुमार, सीटीआई यशवंत कुमार, त्रिपुरारी कुमार सहित कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे.प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
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