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Jamui News : मैथिली शरण गुप्त आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रतिनिधि : प्रो गौरी शंकर

Updated at : 03 Aug 2024 8:53 PM (IST)
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Jamui News : मैथिली शरण गुप्त आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रतिनिधि : प्रो गौरी शंकर

मैथिलीशरण गुप्त की 124वीं जयंती पर केकेएम कॉलेज में आयोजन

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जमुई. मैथिलीशरण गुप्त की 124वीं जयंती पर केकेएम कॉलेज के हिंदी विभाग के तत्वावधान में एक विचार गोष्ठी आयोजित की गयी. इसकी अध्यक्षता हिंदी के सहायक प्राध्यापक सह विभागाध्यक्ष डॉ कैलाश पंडित ने की. मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ चंद्रमा सिंह ने कहा कि मैथिली शरण गुप्त प्रसिद्ध कवि थे. उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं. उनकी कविताएं स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गयी थीं. उनमें राष्ट्र और देश प्रेम की भावना कूट-कूट कर भरी थी. उनकी लेखनी देश भक्ति, समाज सुधार, महिला शिक्षा व अधिकार पर भी चली है. डॉ गौरी शंकर पासवान ने कहा कि मैथिली शरण गुप्त आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रतिनिधि थे. वे प्रकृति के चतुर चितेरे थे. उनका जन्म 3 अगस्त 1886 को यूपी के झांसी में हुआ था. उनका व्यक्तित्व और कृतित्व ही उन्हें अमर बनाता है. साकेत और यशोधरा इनकी अमर रचना हैं. गुप्त जी ने अपनी कविताओं में प्रकृति के सौंदर्य और उसकी महत्ता को उजागर किया है. पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति प्रेम को काफी महत्व दिया है. वर्तमान में जब पर्यावरण संरक्षण एक बड़ी चुनौती बन गयी है. उनके विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं. गुप्त जी की कविताएं हमारी संस्कृति और परंपराओं को समर्पित थीं. उनके विचार सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित और संवर्धित करने में सहायक हैं. उन्होंने राम और कृष्णा की समान भाव से उपासना की है. गांधी के सिद्धांतों को भी अपने कविताओं में पिरोया है. सत्याग्रह, अहिंसा, अछूतोद्धार की भावना से सिद्धांतों का निरूपण किया है. उनके साहित्य और विचारों से लोगों को प्रेरणा मिलती है. नहुष का पतन जैसी श्रेष्ठ रचना के माध्यम से संदेश दिया है कि व्यभिचार और बुरी नजर वालों का मुंह काला होता है. उसे स्वर्ग नहीं बल्कि नर्क मिलता है. अपने अध्यक्षीय संबोधन में हिंदी के विभागाध्यक्ष डॉ कैलाश पंडित ने कहा कि गुप्त हिंदी साहित्याकाश के चंद्र थे. उनकी कविताएं सामाजिक सुधार की पक्षधर थी. उन्होंने जातिवाद, अंधविश्वास और समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की है. उनके विचार आज भी सामाजिक समरसता और सुधार के लिए प्रासंगिक हैं. ऐसे कवियों पर हमें गर्व है, जिन्होंने अपनी लेखनी से भारत का मान बढ़ाया और सिर ऊंचा उठाया. अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अनिंदो सुंदर पोले ने कहा कि गुप्त जी महान काव्यकार थे. उन्होंने यशोधरा काव्य के माध्यम से गौतम बुद्ध की पत्नी यशोधरा के त्याग और पीड़ा का मार्मिक वर्णन किया है. डॉ दीपक कुमार ने कहा कि सुमित्रानंदन पंत हिंदी के उद्भट कवि थे. अपनी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने विदेशी पराधीनता से मुक्त कराने के लिए सोये जनमानस को झकझोरने व जागने का काम किया है. हिंदी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ श्वेता सिंह ने कहा कि राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के सबसे बड़े कवि थे. वे महिला शिक्षा एवं अधिकार के हिमायती थे. अपनी रचनाओं के माध्यम से नारी को सशक्त व स्वतंत्र बनाने का भी समर्थन किया है. भारत-भारती काव्य स्वतंत्रता संग्राम के प्रति गुप्त जी के विचारों का प्रतिबिंब है. मौके पर मौके पर प्रो सरदार राम, डॉ उदय नारायण घोष, डॉ सत्यार्थ प्रकाश, डॉ रूपम कुमारी, डॉ लिसा, कार्यालय सहायक रवीश कुमार सिंह आदि ने भी मैथिली शरण गुप्त के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किये.

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