अधीनस्थ न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना आवश्यक : डॉ अंशुमन

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दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत निरीक्षी न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ अंशुमन ने शुक्रवार को जमुई व्यवहार न्यायालय का निरीक्षण किया.

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जमुई . दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत निरीक्षी न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ अंशुमन ने शुक्रवार को जमुई व्यवहार न्यायालय का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने अधीनस्थ न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाये जाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की. उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए यह एक आवश्यक कदम है. इसके पश्चात माननीय न्यायमूर्ति डॉ अंशुमन ने उपस्थित अधिवक्ताओं एवं सदस्यों को संबोधित करते हुए विधि एवं न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला. अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 130 के प्रावधानों की विस्तार से व्याख्या की तथा इसके प्रयोग में विधिक समझ एवं सतर्कता की आवश्यकता पर बल दिया. वहीं अभियुक्त की अनुपस्थिति में विचारण से संबंधित विधिक प्रावधानों पर चर्चा करते हुए कहा कि न्यायालयों को अभियुक्त के अधिकारों की रक्षा एवं न्याय में अनावश्यक विलंब रोकने के बीच संतुलन बनाकर कानून के अनुरूप कार्य करना चाहिए. उन्होंने आपराधिक न्याय प्रणाली में पीड़ितशास्त्र के महत्व पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि पीड़ित के अधिकार, सम्मान एवं संवेदनशीलता को केंद्र में रखकर ही न्याय की संपूर्ण अवधारणा साकार हो सकती है. संबोधन के समापन में माननीय न्यायमूर्ति डॉ अंशुमन ने न्यायालयों को पेपरलेस बनाये जाने की आवश्यकता पर बल दिया. साथ ही उन्होंने युवा अधिवक्ताओं पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए उन्हें ईमानदारी, परिश्रम एवं नैतिक मूल्यों के साथ न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए आगे आने का आह्वान किया. बैठक का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. इस दौरान सभी न्यायिक पदाधिकारी और अधिवक्ता गण उपस्थित रहे.

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