सागर लांघ लंका पहुंचे हनुमान ने उजाड़ी अशोक वाटिका

गिद्धौर के ऐतिहासिक पंचमंदिर परिसर के समीप सनातन संस्कृति सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय विराट महायज्ञ अपने चरम आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक उत्कर्ष पर पहुंच गया है.
गिद्धौर . गिद्धौर के ऐतिहासिक पंचमंदिर परिसर के समीप सनातन संस्कृति सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय विराट महायज्ञ अपने चरम आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक उत्कर्ष पर पहुंच गया है. महायज्ञ के छठे दिन बीते शनिवार की देर संध्या से रात्रि तक चली रामकथा व रामलीला के जीवंत मंचन ने श्रद्धालुओं को त्रेता युग की अनुभूति करा दी. आयोजन स्थल पर जय श्रीराम के गगनभेदी जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा. श्रीधाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित कृष्णकांत जी महाराज ने श्रद्धालुओं को रामकथा के क्रम में राम–सीता विवाह की भावपूर्ण कथा सुनायी. उन्होंने बताया कि अयोध्या धाम से भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को महर्षि विश्वामित्र मुनियों को सताने वाले असुरों के संहार के लिए अपने साथ ले गये. असुर वध के पश्चात विश्वामित्र जी दोनों भाइयों को जनकपुर ले आये, जहां माता सीता के स्वयंवर की भव्य तैयारियां चल रही थीं. कथा के दौरान जनकपुर पहुंचने पर राम, लक्ष्मण और विश्वामित्र के अतिथिशाला में ठहरने, गौरी पूजन के लिए पुष्प वाटिका पहुंचीं माता सीता और वहीं राम–सीता के प्रथम साक्षात्कार का मनोहारी प्रसंग सुनाया गया. यह प्रसंग सुनते ही पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे. इसके बाद स्वयंवर सभा में भगवान श्रीराम के प्रत्यंचा चढ़ाते ही शंकर भगवान के पिनाक धनुष टूट गया और स्वयंवर की शर्त पूरी होते ही माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी. कथा के क्रम में अयोध्या से महाराज दशरथ के जनकपुर आगमन, भव्य बारात व भगवान श्रीराम सहित चारों भाइयों राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न के विवाह का उल्लासपूर्ण वर्णन किया गया. इस दौरान गिद्धौर की दो बालिकाओं ने भगवान श्रीराम और जनकनंदिनी सीता का स्वरूप धारण करने से पूरा पंडाल विवाहोत्सव के रंग में रंग गया. श्रद्धालुओं ने हल्दी लगाकर उनका दर्शन किया, जिससे माहौल और भी भावुक व आनंदमय हो उठा.
रामलीला देखने के लिए उमड़ी भीड़
इधर, महायज्ञ के अंतर्गत आयोजित रामलीला में कथा आगे बढ़ते हुए सीता हरण के पश्चात के प्रसंग को दर्शाया गया. माता सीता की खोज में निकले श्रीराम की भेंट जटायु से हुई. जिन्होंने रावण द्वारा सीता हरण की जानकारी दी. इसके बाद राम के निर्देश पर हनुमान जी ने सागर लांघकर लंका पहुंचने, माता सीता को राम संदेश देने, अशोक वाटिका उजाड़ने और राक्षसों के संहार का दृश्य बड़े ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया. रामलीला के दौरान पंडाल दर्शकों से खचाखच भरा रहा और श्रद्धालुओं ने तालियों व जयघोष से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया. महायज्ञ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रतिदिन भव्य भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग महाप्रसाद ग्रहण कर रहे हैं. कार्यक्रम के सफल आयोजन में सनातन संस्कृति सेवा समिति के अध्यक्ष सोनू कुमार, सचिव सुमन कुमार, सह सचिव सुशांत साईं सुंदरम, कोषाध्यक्ष बिट्टू कुमार, सह-कोषाध्यक्ष रॉकी कुमार, उपाध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ पाजो जी सहित राहुल रावत, युवराज कुमार, राकेश कुमार राम, धीरज रावत, रनबीर राव, संतोष पंडित, ठाकुर अंकित, ब्रह्मदेव कुमार, आदित्य रावत समेत अन्य सदस्य पूरी निष्ठा से जुटे हुए हैं. समिति के सचिव सुमन कुमार ने बताया कि प्रतिदिन संध्या पांच बजे से पंडित कृष्णकांत जी महाराज द्वारा श्रीरामकथा का वाचन तथा संध्या आठ बजे से प्रयागराज की रामलीला मंडली द्वारा भव्य रामलीला का मंचन किया जा रहा है. वहीं संध्या सात बजे से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था है. इस विराट आयोजन में राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति भी देखने को मिल रही है. विराट महायज्ञ और रामलीला के माध्यम से गिद्धौर का संपूर्ण वातावरण इन दिनों भक्ति, आस्था और सनातन संस्कृति की आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया है.
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