कस्तूरबा विद्यालय की बेटियों के सपनों पर ब्रेक, टाइप-4 न बनने से आठवीं के बाद रुक जाती है पढ़ाई

कई वर्षों के बाद भी कस्तूरबा विद्यालय आज भी टाइप-2 से आगे नहीं बढ़ पाया है.
बरहट. प्रखंड की नुमर पंचायत अंतर्गत पचेश्वरी गांव में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक व गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की बेटियों के लिए शिक्षा का सहारा बना हुआ है. यहां से पढ़कर सैकड़ों बच्चियां अपने गांवों में शिक्षा की अलख जगा चुकी हैं, लेकिन विडंबना यह है कि कई वर्षों के बाद भी यह विद्यालय आज भी टाइप-2 से आगे नहीं बढ़ पाया है. नतीजतन यहां की छात्राओं की पढ़ाई आठवीं के बाद थम जाती है और उनके सपने अधूरे रह जाते हैं. विद्यालय में कक्षा छह से आठ तक ही पढ़ाई की व्यवस्था है. आठवीं पास करने के बाद छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए अपने गांव से कई किलोमीटर दूर खैरा, सोनो और चकाई जैसे इलाकों का रुख करना पड़ता है. ग्रामीण परिवेश और सुरक्षा की चिंता के कारण अधिकांश अभिभावक बेटियों को इतनी दूर पढ़ने नहीं भेजते. मजबूरन बच्चियों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है और कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी जाती है. विद्यालय की छात्राओं ने जिला प्रशासन से विद्यालय को टाइप-4 में अपग्रेड करने की मांग की है, ताकि यहां इंटर तक की पढ़ाई शुरू हो सके और वे अपने गांव में रहकर ही शिक्षा हासिल कर सकें. इन बच्चियों के सपने भी बड़े हैं. कोई शिक्षिका बनना चाहती है, तो कोई पुलिस, डॉक्टर या आइपीएस अधिकारी बनने का लक्ष्य लेकर पढ़ाई कर रही है.
100 छात्राएं हैं नामांकित
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में कक्षा 6 से 8 तक कुल 100 छात्राएं नामांकित हैं. विद्यालय में एक वार्डन, दो शिक्षिकाएं, एक आदेशपाल, एक लेखापाल और तीन रसोइयों की नियुक्ति है. सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यालय परिवार बच्चियों को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास कर रहा है.दुर्गम गांवों की बच्चियों के लिए यह विद्यालय सहारा
सुविधाओं का अभाव सबसे बड़ी बाधा विद्यालय की पूर्व छात्रा सीमा, बिंदु, चंपा और रिशु तथा वर्तमान छात्राएं सीता, सरस्वती, कंचन और निक्की बताती हैं कि नक्सल प्रभावित गुरमाहा, चोरमारा, जमुनियांटांड़ और पैसरा जैसे दुर्गम गांवों की बच्चियों के लिए यह विद्यालय शिक्षा का एकमात्र सहारा है. लेकिन सुविधाओं की कमी इसकी सबसे बड़ी बाधा बन गयी है. यहां टाइप-3 और टाइप-4 भवन का निर्माण अब तक नहीं हो सका है, जिसके कारण आठवीं के बाद पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं है. इससे बच्चियों के उज्ज्वल भविष्य पर सीधा असर पड़ रहा है.जिला अधिकारी से भी लगा चुकी हैं गुहार
पिछले वर्ष अगस्त माह में चोरमारा गांव स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर में आयोजित ग्राम विकास शिविर के दौरान छात्राओं ने तत्कालीन जिलाधिकारी के सामने अपनी समस्या रखी थी. उस समय टाइप-3 भवन निर्माण का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन इतने समय बाद भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है.सुरक्षा के लिए चहारदीवारी की मांग
छात्राओं का कहना है कि विद्यालय परिसर में चहारदीवारी नहीं होने से सुरक्षा की समस्या बनी रहती है. गांव के बच्चे भी उसी मैदान में खेलते हैं, जिससे छात्राओं को पढ़ाई या धूप में बैठने में परेशानी होती है. छात्राओं ने परिसर में चहारदीवारी निर्माण के साथ ही छात्रावास भवन में सीढ़ी बनाने की भी मांग की है, ताकि वे स्कूल की छत पर अपने कपड़े सुखा सकें.क्या कहती हैं वार्डन
विद्यालय की वार्डन दीप प्रभा का कहना है कि टाइप-2 विद्यालय होने के कारण यहां आठवीं तक ही पढ़ाई संभव है. यदि इसे उच्च श्रेणी में अपग्रेड किया जाये तो आसपास के गांवों की बच्चियों को बिना रुकावट अपनी पढ़ाई जारी रखने का मौका मिल सकेगा.क्या कहते हैं प्रखंड विकास पदाधिकारी
प्रखंड विकास पदाधिकारी एसके पांडेय ने बताया कि टाइप-3 भवन निर्माण फिलहाल जमीन की अनुपलब्धता के कारण अटका हुआ है. उपयुक्त भूमि की पहचान के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है. जमीन उपलब्ध होते ही विभाग को रिपोर्ट भेजकर भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जायेगी.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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