नक्सल प्रभावित गांव के सचिन कुमार बने SDM, रेलवे टेक्नीशियन से प्रशासनिक अधिकारी बनने की प्रेरक कहानी
सचिन कुमार परिवार के साथ
BPSC 70th Result: जमुई जिले के खैरा प्रखंड के नक्सल प्रभावित मिलनीटांड गांव के रहने वाले सचिन कुमार ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 104वीं रैंक हासिल कर एसडीएम पद के लिए चयनित होकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों को रोक नहीं सकतीं.
जमुई से गुलशन कश्यप की रिपोर्ट
BPSC 70th Result: कभी नक्सल प्रभावित इलाके के छोटे से गांव में सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करने वाले सचिन कुमार आज हजारों युवाओं के लिए मिसाल बन गए हैं. किसान परिवार से निकलकर रेलवे में टेक्नीशियन की नौकरी, फिर केंद्र सरकार में अधिकारी और अब बीपीएससी 70वीं परीक्षा में 104वीं रैंक हासिल कर एसडीएम पद तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, धैर्य और निरंतर मेहनत की अनोखी कहानी है. सचिन की सफलता ने पूरे जमुई जिले को गौरवान्वित कर दिया है.
नक्सल प्रभावित गांव से निकली सफलता की नई कहानी
मिलनीटांड गांव लंबे समय से नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है. ऐसे इलाके से निकलकर सचिन कुमार ने शिक्षा और मेहनत के बल पर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने का सपना साकार किया. उनकी इस उपलब्धि से गांव और पूरे खैरा प्रखंड में खुशी का माहौल है.
रेलवे टेक्नीशियन से शुरू हुआ संघर्ष का सफर
सचिन ने प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की और जमुई के सरस्वती अर्जुन एकलव्य महाविद्यालय से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. वर्ष 2020 में भारतीय रेलवे में टेक्नीशियन पद पर चयनित होकर उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की. नौकरी के साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी.
एक के बाद एक परीक्षाओं में मिली सफलता
वर्ष 2022 में सचिन ने एसएससी सीजीएल परीक्षा पास कर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर का पद प्राप्त किया. इसके बाद बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर राजस्व अधिकारी बने और वर्तमान में बेगूसराय जिले के बखरी में पदस्थापित हैं.
चौथे प्रयास में मिला SDM बनने का सपना
सचिन ने हार नहीं मानी और लगातार तैयारी जारी रखी. आखिरकार बीपीएससी 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 104वीं रैंक प्राप्त कर एसडीएम पद के लिए चयनित हो गए. यह सफलता उन्हें चौथे प्रयास में मिली है.
किसान परिवार के बेटे ने बढ़ाया जिले का मान
सचिन के पिता खेती-किसानी करते हैं, जबकि उनका भाई दुकान चलाकर परिवार का सहयोग करता है. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. यही वजह है कि आज उनकी सफलता पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.
अब UPSC है अगला लक्ष्य
एसडीएम पद के लिए चयनित होने के बाद भी सचिन का लक्ष्य यहीं खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवाओं में स्थान हासिल करना है.
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