नितेश हत्याकांड: एक सप्ताह बाद भी आश्वासन पर अटकी है पुलिस

Updated at : 13 Nov 2019 7:21 AM (IST)
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नितेश हत्याकांड: एक सप्ताह बाद भी आश्वासन पर अटकी है पुलिस

जमुई : सीएसपी संचालक नितेश सिंह उर्फ घोलटी की निर्मम हत्या कर 12 लाख रूपये लूटने मामले को 1 सप्ताह गुजर जाने के बाद भी अब तक पुलिस महज आश्वासन पर ही अटकी हुई है तथा इस मामले में अब तक कोई भी सार्थक कार्रवाई देखने को नहीं मिल सकी है. जिस कारण मृतक नितेश […]

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जमुई : सीएसपी संचालक नितेश सिंह उर्फ घोलटी की निर्मम हत्या कर 12 लाख रूपये लूटने मामले को 1 सप्ताह गुजर जाने के बाद भी अब तक पुलिस महज आश्वासन पर ही अटकी हुई है तथा इस मामले में अब तक कोई भी सार्थक कार्रवाई देखने को नहीं मिल सकी है. जिस कारण मृतक नितेश सिंह के घर वाले पूछने लगे हैं कि हमें इंसाफ कब मिलेगा. आखिर कब नितेश सिंह के हत्यारे सलाखों के पीछे पहुंच पाएंगे या इस मामले में पुलिस क्यों इतनी लचर कार्रवाई कर रही है.

गौरतलब है कि बीते बुधवार को सदर थाना क्षेत्र के इंदपै गांव निवासी सीएसपी संचालक नितेश सिंह की उस वक्त हत्या कर दी गई थी जब वह 11 लाख 90 हजार रूपये लेकर अपने घर जा रहा था. इस दौरान अपराधियों ने उसकी हत्या कर उसे पैसे लूट लिए थे. जिसके बाद मामले में पुलिस अधीक्षक सहित वरीय पुलिस पदाधिकारी कई मर्तबा त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दे चुके हैं.
पर आलम यह हो गया है कि पुलिस इस पूरे मामले में अब तक केवल आश्वासन पर ही सीमित रह गई है तथा कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हुई है जिससे मृतक के परिजनों को भरोसा हो सके कि पुलिस इस मामले में तत्परता से जुटी हुई है. बताते चलें की हत्या के बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर 3 लोगों को हिरासत में भी लिया था और बीते दिनों उन तीनों को भी छोड़ दिया गया तथा उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.
बताते चलें कि उक्त तीनों युवकों को मौके से कारतूस उठाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था तथा उक्त युवकों ने पुलिस के समक्ष कारतूस प्रस्तुत भी किया था. जिसके बाद भी पुलिस ने यह मानते हुए कि उन तीनों संदिग्ध युवकों का हत्या के मामले से कोई संबंध नहीं है उन्हें छोड़ दिया गया. ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि आखिर पुलिस ने उन तीनों को किस आधार पर छोड़ दिया.
आखिर क्यों नहीं की कार्रवाई : बताते चलें कि किसी भी घटनास्थल से साक्ष्य छिपाने या मिटाने के आरोप में भारतीय दंड विधान (आईपीसी) संहिता की धारा 201 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है तथा साक्ष्य मिटाने या उसका विलोप करने के आरोप में न्यूनतम 1 माह से अधिकतम 7 वर्ष तक की सजा का भी प्रावधान है.
यदि अपराध मॄत्यु से दण्डनीय हो, तो साक्ष्य मिटाने के आरोपित को किसी एक अवधि के लिए कारावास (जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है) से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा. ऐसे में पुलिस ने उन तीनों युवकों के खिलाफ आईपीसी की धारा 201 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की. सवाल कई है पर किसी का जवाब अब तक नहीं मिल पाया है.
ऐसे में मृतक सीएसपी संचालक के परिजनों में पुलिस के प्रति भी रोष बढ़ने लगा है तथा अब पुलिसिया कार्रवाई पर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं. वही मृत सीएसपी संचालक से सरेराह लूट और हत्या की वारदात के बाद लोगों में खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है तथा अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होने से लोग खैरा-जमुई मार्ग पर अब और ज्यादा भय के साए में यात्रा करने को विवश हैं.
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