हरिवंश नारायण सिंह फिर बने राज्यसभा सांसद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया नामित

हरिवंश नारायण सिंह
Harivansh Narayan Singh: देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा का नामित सदस्य बनाया है. उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद यह फैसला लिया गया है, जिससे उनकी संसदीय भूमिका आगे भी जारी रहने की संभावना बढ़ गई है.
Harivansh Narayan Singh: भारतीय राजनीति और संसदीय गरिमा के प्रति अपनी अटूट निष्ठा के लिए पहचाने जाने वाले हरिवंश नारायण सिंह के लिए एक नई और महत्वपूर्ण पारी की शुरुआत हो गई है.
देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के नामित सदस्य के रूप में फिर से नियुक्त किया है. हाल ही में उनका कार्यकाल समाप्त हुआ था, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में उनके अगले कदम को लेकर कई कयास लगाए जा रहे थे.

राष्ट्रपति के इस फैसले ने न केवल उनकी संसदीय यात्रा को विस्तार दिया है, बल्कि सदन में उनके द्वारा निभाए गए संतुलित और निष्पक्ष नेतृत्व पर भी मुहर लगा दी है.
9 अप्रैल को खत्म हुआ कार्यकाल
हरिवंश का 9 अप्रैल को ही कार्यकाल समाप्त हुआ था और अगले ही दिन उन्हें नया मौका मिल गया है. पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक मनोनीत सांसद की सीट खाली थी. उसी स्थान पर हरिवंश का मौका मिला है.
69 साल के हरिवंश पहले ही दो बार राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वह उच्च सदन के उपसभापति भी रहे है
पत्रकारिता के शिखर से संसद के आसन तक
हरिवंश नारायण सिंह का सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है. राजनीति की चकाचौंध में आने से पहले वे पत्रकारिता जगत का एक बहुत बड़ा नाम रहे हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से शिक्षित हरिवंश जी की लेखनी में हमेशा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की चिंता झलकती थी.
साल 2014 में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के जरिए बिहार से राज्यसभा पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी बौद्धिक क्षमता और सादगी से सबको प्रभावित किया.
उपसभापति के रूप में निष्पक्षता की मिसाल
संसद के उच्च सदन में उपसभापति की कुर्सी संभालना कांटों भरे ताज जैसा होता है, लेकिन हरिवंश जी ने इसे बेहद कुशलता से निभाया. 14 सितंबर 2020 को जब वे दूसरी बार उपसभापति चुने गए, तब से लेकर अब तक उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक मजबूत सेतु का काम किया है.
शोर-शराबे और हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही को शांत और गरिमापूर्ण तरीके से संचालित करने की उनकी शैली की तारीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर विपक्षी नेताओं तक ने की है. वे सदन में हर सदस्य को अपनी बात रखने का मौका देने और नियमों के पालन में कभी समझौता नहीं करने के लिए जाने जाते हैं.
Also Read: शराबबंदी, आरक्षण समेत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 10 यादगार फैसले, जिसने बिहार को दी नई राह
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




