गोरौल. गोरौल प्रखंड के नगर पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय भटौलिया के जमीन रजिस्ट्री प्रकरण को लेकर चौथे दिन भी ग्रामीणों की ओर से विद्यालय में तालाबंदी जारी रही. तालाबंदी के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई पहल नहीं होते देख ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता गया. इसके विरोध में ग्रामीणों ने विद्यालय के पोषक क्षेत्र में जिला प्रशासन का पुतला बनाकर भ्रमण किया और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. भ्रमण के बाद विद्यालय परिसर में पुतला दहन किया गया. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी उसकी कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, और यह शिक्षा के प्रति उदासीनता को दर्शाती है. उनका आरोप है कि 20 अक्तूबर 2024 से अब तक किसी भी पदाधिकारी ने इस मामले में अपना स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठने लगे हैं. कुछ जनप्रतिनिधियों ने यहां तक कहना शुरू कर दिया है कि एनडीए को वोट देने का यही परिणाम है कि पदाधिकारी जनता की बात नहीं सुन रहे हैं. निचले स्तर के अधिकारी उच्चाधिकारियों तक बात पहुंचाने में असफल हैं. क्योंकि उन्हें कार्रवाई या दंड का भय बना रहता है. ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल जमीन रजिस्ट्री तक सीमित नहीं है. बीते वर्ष जनवरी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नगवा विकास यात्रा के दौरान जिले में 400 से अधिक योजनाओं का शिलान्यास किया गया था, जिनमें इस विद्यालय के विकास से संबंधित योजना भी शामिल थी. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर केवल बहाने बनाये जा रहे हैं. कभी सीओ द्वारा जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया में देरी की जा रही है तो कभी सीओ के अवकाश पर होने की बात कही जाती है, जबकि अवकाश की स्थिति में भी राजस्व अधिकारी मौजूद रहते हैं. सरकारी कार्य का यह मतलब नहीं कि किसी पदाधिकारी की अनुपस्थिति में पूरा कार्यालय ही निष्क्रिय हो जाये. ऐसे में या तो राजस्व विभाग काम करना नहीं चाहता, या जानबूझकर मामले को लंबित रखा जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि जब डेढ़ साल में एक समस्या का समाधान नहीं हो सका, तो क्षेत्र का विकास कैसे संभव होगा. स्थिति यह है कि बच्चों के लिए स्कूल बंद है. तालाबंदी के दौरान शिक्षकों को भीषण ठंड में सड़क पर बैठना पड़ रहा है, जिसमें विशेष रूप से महिला शिक्षकों को काफी परेशानी हो रही है. वहीं ग्रामीण भी स्कूल गेट पर डटे हुए हैं. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि लगभग 65 वर्ष पूर्व जब यह सरकारी विद्यालय बना था, तब स्थानीय प्रशासन और सरकार के नाम से दान पत्र अवश्य बनाया गया होगा. मौजूदा हालात गोरौल अंचल और प्रखंड कार्यालय की कार्यप्रणाली की पोल खोलती हैं. वर्तमान में गोरौल अंचल क्षेत्र की स्थिति यह है कि कुछ कर्मियों के कारण सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है. यहां तो आम लोग अपनी जमीन देना चाहते हैं, लेकिन सरकारी तंत्र जमीन लेने को तैयार नहीं है. जमीन रजिस्ट्री को लेकर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन राज्यपाल के नाम निबंधित कराना चाहता है, तो सबसे पहले उसे निशुल्क निबंधन के लिए जिला पदाधिकारी को लिखित आवेदन देना होगा. आवेदन में जमीन की पूरी स्थिति का उल्लेख होगा, जिसके बाद अंचल कार्यालय द्वारा भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट डीसीएलआर, अनुमंडल पदाधिकारी के माध्यम से अपर समाहर्ता को भेजी जायेगी. सभी स्तरों से अनुमोदन मिलने के बाद अपर समाहर्ता जिला पदाधिकारी को जमीन रजिस्ट्री का प्रस्ताव स्वीकृत कर भेजेंगे. इसके बाद जिला पदाधिकारी जमीन के उपयोग के लिए संबंधित विभागीय अधिकारी को नामित करेंगे, जो रजिस्ट्री ग्रहण करेंगे. साथ ही निबंधन अधिकारी को नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए आदेश जारी किया जायेगा.
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