वैशाली में नहीं मिल रहा सरकारी दर पर धान का बीज, आधा जून बीतने के बाद किसानों की बढ़ी चिंता

Edited by Vivek Pandey
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Hajipur News: वैशाली जिले में आधा जून बीतने के बाद भी किसानों को अनुदानित दर पर धान का बीज नहीं मिल पाया है. अधिक तापमान और देरी से बीज उपलब्ध होने के कारण धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है.

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Hajipur News: (गोपाल कुमार राय) वैशाली जिले में इस वर्ष औसत से अधिक बारिश होने के बावजूद धान उत्पादक किसानों की चिंताएं कम नहीं हुई हैं. आधा जून बीत जाने के बाद भी कृषि विभाग की ओर से किसानों को अनुदानित दर पर धान का बीज उपलब्ध नहीं कराया जा सका है. इसके चलते कई किसान अब तक धान का बिचड़ा नहीं गिरा पाए हैं, जबकि कुछ किसानों को मजबूरी में बाजार से महंगे दामों पर बीज खरीदना पड़ रहा है.

अधिक तापमान और कड़ी धूप से प्रभावित हो रही खेती

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की नर्सरी तैयार करने के लिए 5 जून से समय अनुकूल माना जाता है. हालांकि इस बार अधिक तापमान और तेज धूप के कारण किसान बिचड़ा गिराने से बच रहे हैं. कई स्थानों पर पंपिंग सेट के सहारे सिंचाई कर बिचड़ा डाला गया है, लेकिन अत्यधिक गर्मी के कारण पौधों का विकास प्रभावित हो रहा है.

48,831.58 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य

जिला कृषि कार्यालय के अनुसार इस वर्ष जिले में 48,831.58 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके लिए 4,883.16 हेक्टेयर में बिचड़ा तैयार करने की योजना बनाई गई है. वहीं खरीफ मौसम में मक्का की खेती का लक्ष्य 12,530.90 हेक्टेयर रखा गया है.

किसानों का कहना है कि समय पर बीज उपलब्ध नहीं होने से सरकारी योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है और खेती का कैलेंडर प्रभावित हो रहा है.

अब शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया, किसानों में नाराजगी

विभागीय सूत्रों के अनुसार आधा जून बीतने के बाद अब अनुदानित बीज के लिए आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है. किसानों का कहना है कि यह प्रक्रिया कम से कम एक माह पहले शुरू होनी चाहिए थी, ताकि समय रहते बीज उपलब्ध हो सके.

फार्मर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, तभी मिलेगा योजना का लाभ

जिला कृषि कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि अनुदानित बीज, कृषि यंत्र, खाद अथवा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों का फार्मर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है. जिन किसानों ने अब तक पंजीकरण नहीं कराया है, वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह सकते हैं. अधिकारियों ने यह भी बताया कि बिना फार्मर रजिस्ट्रेशन के पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ मिलने में भी परेशानी आ सकती है.

प्रखंडवार धान आच्छादन लक्ष्य में पातेपुर सबसे आगे

जिले में पातेपुर प्रखंड के लिए सबसे अधिक 9,246 हेक्टेयर में धान आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके बाद महुआ (5,012.02 हेक्टेयर), जंदाहा (3,990.06 हेक्टेयर), वैशाली (3,760.09 हेक्टेयर) और चेहराकला (3,021.45 हेक्टेयर) प्रमुख हैं. कृषि विभाग ने सभी प्रखंडों में लक्ष्य के अनुरूप खेती सुनिश्चित करने की तैयारी की है, लेकिन बीज की समय पर उपलब्धता किसानों की सबसे बड़ी मांग बनी हुई है.

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लेखक के बारे में

By Vivek Pandey

विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने ​बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. ​बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. ​जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.

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