रासायनिक खेती से मुक्ति की ओर कदम, वैशाली में कृषि विज्ञान केंद्र की पहल

Published by : YUVRAJ RATAN Updated At : 09 Jun 2026 6:07 PM

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जागरूकता कार्यक्रम में मौजूद किसान और वैज्ञानिक

Hajipur News : हाजीपुर के राजापाकर में खेत बचाओ अभियान के तहत जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित.

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राजापाकर (हाजीपुर) से नीरज कुमार की रिपोर्ट
Hajipur News : राजापाकर कृषि विज्ञान केंद्र हरिहरपुर वैशाली के द्वारा राजापाकर प्रखंड क्षेत्र के हरपुर मुकुंद में खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत संतुलित जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती विषय पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम डॉक्टर अनिल कुमार सिंह , वरीय एवं प्रधान के दिशानिर्देश में संपन्न हुआ.

वैज्ञानिकों ने किसानों को बताए 17 पोषक तत्वों का महत्व

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. रत्नेश कुमार झा, डॉ. आर.के. तिवारी (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली), डॉक्टर अनिल कुमार सिंह (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र वैशाली) तथा कृषि अभियंता इंजीनियर कुमारी नम्रता उपस्थित रहीं. कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को संबोधित करते हुए संतुलित उर्वरक के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पौधों को वृद्धि एवं उत्पादन के लिए कुल 17 आवश्यक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है. यदि किसान वर्मी कम्पोस्ट एवं जैविक खाद का उपयोग करते हैं तो इससे सभी आवश्यक पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से प्राप्त होते हैं. जिससे मिट्टी की उर्वरता एवं स्वास्थ्य में निरंतर सुधार होता है.

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को किया प्रेरित

वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है. जिससे पौधों द्वारा पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होता है. इसका प्रत्यक्ष प्रभाव फसल की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता एवं रोग नियंत्रण पर सकारात्मक रूप से पड़ता है. कार्यक्रम में किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपना विचार प्रस्तुत किया. यह कार्यक्रम वैशाली जिला के अन्य प्रखंड हाजीपुर प्रखंड के गुर्मियां गांव में भी संतुलित उर्वरक विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक रहा. जिससे उन्हें संतुलित उर्वरक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरणा मिली. कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान वीरचंद्र जी, प्रभु दयाल सिंह, तेज नारायण सिंह ,धर्मेंद्र जी, वीरेंद्र सिंह, पवन कुमार एवं अन्य किसान उपस्थित थे.

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