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गोपालगंज में बढ़ी एड्स से पीड़ित मरीजों की संख्या, मचा हड़कंप, गर्भवती महिलाओं के साथ, थर्ड जेंडर भी…

Updated at : 29 Aug 2024 1:37 PM (IST)
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गोपालगंज में बढ़ी एड्स से पीड़ित मरीजों की संख्या, मचा हड़कंप, गर्भवती महिलाओं के साथ, थर्ड जेंडर भी…

Gopalganj News: बिहार के गोपालगंज में एड्स के मरीजों की बढ़ती संख्या ने हड़कंप मचा दिया है. यहां गर्भवती महिलाओं के साथ साथ थर्ड जेंडर भी इस बीमारी से ग्रसित पाए गए हैं. जिले में एड्स से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है जिससे जिले में हड़कंप मचा हुआ है.

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Gopalganj News: बिहार के गोपालगंज में एड्स के मरीजों की बढ़ती संख्या ने हड़कंप मचा दिया है. यहां गर्भवती महिलाओं के साथ साथ थर्ड जेंडर भी इस बीमारी से ग्रसित पाए गए हैं. जिले में एड्स से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है जिससे जिले में हड़कंप मचा हुआ है. पिछले साल की तुलना में इस बार 34 मरीज जांच में ज्यादा मिले हैं. इसमें पुरुषों महिलाओं के साथ साथ थर्ड जेंडर भी शामिल हैं. पिछले कुछ वर्षों में मिले तीन हजार एक सौ मरीजों का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है. बुधवार को सदर अस्पताल में एड्स से बचाव को लेकर काउंसलर पूनम कुमारी और स्वास्थ्य कर्मियों ने बैठक की.

जागरूकता अभियान के बावजूद भी मरीजों की संख्या का बढ़ना चिंताजनक

यहां मरीजों की काउंसलिंग भी की जाती है. अस्पताल के सूत्रों की माने तो एड्स से पीड़ित मरीजों में प्रवासियों की संख्या ज्यादा है. अस्पताल में मरीजों को मुफ्त दवा दी जा रही है. विभाग के अनुसार एड्स से बचने के लिए जिले में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. लेकिन इन सब के बावजूद भी मरीजों की संख्या का बढ़ना चिंताजनक है. सदर अस्पताल के एआरटी सेंटर में साल 2023-24 में अब तक कुल 16647 पुरुष और महिलाओं की जांच हुई. जिसमे 313 लोग एड्स से पीड़ित पाए गए. 11980 महिलाओं में 27 गर्भवती महिलाएं भी इस रोग से पीड़ित हैं. थर्ड जेंडर में 17 लोगों की जांच की गई.जिसमे 3 लोग एड्स से पीड़ित मिले.

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पिछले वर्ष 279 लोग हुए थे पीड़ित, इस बार 313 लोग मिले

साल 2022-23 में कुल 10279 जांचें हुईं जिनमें कुल 279 लोग पीड़ित मिले थे. इस जांच में 5711 पुरुषों के जांच में 200 पीड़ित, और 4557 गर्भवती महिलाओं की जांच में 78 मरीज मिले थे. एक थर्ड जेंडर भी एड्स से पीड़ित मिला था. सेंटर की काउंसलर ने बताया की यह एक लाइलाज बीमारी है. इसका कोई इलाज नहीं है. लेकिन दवाओं के नियमित सेवन, तनावमुक्त जीवन शैली अपना कर लोग अपना जीवन जी सकते हैं. सतर्कता ही एड्स से सुरक्षा है.

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Puspraj Singh

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Puspraj Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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