Gopalganj News : बाढ़ का पानी पांच दिनों में घरों से निकल तो गया, लेकिन छोड़ गया पूरे साल की बर्बादी

Updated at : 06 Oct 2024 10:10 PM (IST)
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Gopalganj News : बाढ़ का पानी पांच दिनों में घरों से निकल तो गया, लेकिन छोड़ गया पूरे साल की बर्बादी

Gopalganj News : मांझा के निमुइया गांव के देवंती देवी अपने बच्चों व सास के साथ गांव में रहती हैं. पति मुंबई में काम करते हैं. पिछले सोमवार को निमुइया गांव में आयी बाढ़ के कारण देवंती देवी का घर जलमग्न हो गया. पूरा परिवार छत पर रहकर पानी के कम होने का इंतजार करने लगा.

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गोपालगंज. मांझा के निमुइया गांव के देवंती देवी अपने बच्चों व सास के साथ गांव में रहती हैं. पति मुंबई में काम करते हैं. पिछले सोमवार को निमुइया गांव में आयी बाढ़ के कारण देवंती देवी का घर जलमग्न हो गया. पूरा परिवार छत पर रहकर पानी के कम होने का इंतजार करने लगा. खाने-पीने के कुछ सामान छत पर रख कर प्लास्टिक से तोपकर बचा लिया. पांच दिनों के बाद नदी का पानी घर से निकल गया. पानी के धार में घर का अनाज, बिछावन, कपड़ा बह गया. कुछ बोरे में रखे अनाज के डूबने से वह सड़ रहा है. घरों में से बदबू निकल रही है. रविवार को प्रभात खबर की टीम जब गांव में पहुंची, तो देवंती चावल साफ कर रही थीं कि खाना बना सकें. वर्षों की कमाई को बाढ़ ने बहा लिया. देवंती ने कहा कि पति कमा कर भेजेंगे, तो कई महीने लगने के बाद फिर से गृहस्थी को खड़ा हो सकेगा. अकेले देवंती ही नहीं, उनके जैसे 15 हजार परिवार के सामने कमोबेश यही पीड़ा है. नेपाल से जलसैलाब में गोपालगंज जिले के छह प्रखंडों के 43 गांवों के लोगों की समृद्धि भी बह गयी है. अब उनको खड़ा होने में छह माह का वक्त लगेगा. प्रशासन की ओर से इन पीड़ित परिवारों को राहत अब तक नहीं पहुंच सकी है. वहीं पीड़ित परिवार को सात हजार रुपये देने का एलान सरकार की ओर से किया जा चुका है, जिससे पीड़ित बर्तन, साग-सब्जी व जरूरी सामान खरीद कर गृहस्थी को पटरी पर ला सकें. पीड़ित इलाके में संक्रमण का बढ़ा खतरा पीड़ित गांवों से पानी तो कम हो गया है, लेकिन अब लोगों में संक्रामक बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है. इन गांवों के 40 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं. लोगों को इलाज करवाने के लिए अस्पताल पहुंचने में कठिनाई से आना-जाना पड़ रहा है. गांवों में सड़ांध के कारण गांवों में बदबू निकल रही है. गांवों में ब्लीचिंग पाउडर छिडकाव कराने की मांग लोगों के द्वारा की जा रही है. कुछ इलाकों में छिड़काव कराया भी जा रहा है. वरीय अधिकारियों को मॉनीटरिंग कर संक्रमण से लोगों काे बचाने की जरूरत है. गंडक नदी की लहरें शांत हो चुकी हैं. रविवार को गंडक नदी में वाल्मीकिनगर बराज से शाम को चार बजे 72 हजार क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज किया गया. वहीं विशंभरपुर में नदी खतरे के निशान से 64 सेमी नीचे, तो पतहरा में 56 सेमी व टंडसपुर में 28 सेमी नीचे चला गया है. इसके बाद भी तटबंधों पर कटाव को लेकर इंजीनियरों की टीम मुस्तैद है. बांध पर कही कोई कटाव का खतरा नहीं होने के बाद भी निगरानी की जा रही है. उधर, नेपाल में 9 व 10 अक्तूबर को बारिश का अलर्ट विभाग की ओर से जारी किया गया है.

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