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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सीजेएम कोर्ट से जारी इश्तेहार व कुर्की आदेश को किया रद्द

Updated at : 10 Aug 2024 9:43 PM (IST)
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Lawrence Bishnoi

गोपालगंज. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश कुमार गोयल की कोर्ट ने सीजेएम की इश्तेहार व कुर्की-जब्ती आदेश को जल्दीबाजी में लिया गया मानते हुए रद्द कर दिया. कोर्ट ने इसे नियमों के पालन में चूक माना है.

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गोपालगंज. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश कुमार गोयल की कोर्ट ने सीजेएम की इश्तेहार व कुर्की-जब्ती आदेश को जल्दीबाजी में लिया गया मानते हुए रद्द कर दिया. कोर्ट ने इसे नियमों के पालन में चूक माना है. बचाव पक्ष के वरीय अधिवक्ता राजेश पाठक ने सीवान जिले के बड़हरिया थाना के सुरहिया गांव के जुल्फीकार अली की पत्नी सविहा खातून की ओर से जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरुविंदर सिंह मलहोत्रा की कोर्ट में सीजेएम कोर्ट की ओर से जारी कुर्की-जब्ती वारंट के खिलाफ रिविजन जुलाई में दाखिल किया था, जिसे जिला जज ने एडीजे पांच की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया, जहां पर्याप्त साक्ष्य देकर बताया गया कि बरौली पुलिस ने मजदूर हत्याकांड में सीजेएम कोर्ट में चार जुलाई को गैर-जमानतीय वारंट के लिए प्रे किया. पुलिस द्वारा बिना तामिला रिपोर्ट दाखिल किये ही छह जुलाई को सीजेएम न्यायालय द्वारा इश्तेहार जारी कर दिया गया. दंड प्रक्रिया संहिता 82 के अनुसार इस्तेहार निर्गत होने के 30 दिन बाद कुर्की का आदेश जारी करने का प्रावधान है. विशेष परिस्थिति में पुलिस द्वारा शपथ पत्र दाखिल किये जाने पर ही और कुर्क की जाने वाली संम्पत्ति का ब्योरा न्यायालय में पुलिस द्वारा दाखिल करने पर 82 एवं 83 अर्थात उद्घोषणा और कुर्की के बीच समय सीमा की विहित अवधि को न्यायालय द्वारा कम किया जा सकता है, किन्तु न तो पुलिस ने कोई शपथ पत्र दाखिल किया और न ही कुर्क की जाने वाली संपत्ति का ब्योरा न्यायालय में दाखिल किया गया. इसके बावजूद सीजेएम न्यायालय ने 10 जुलाई को ही कुर्की-जब्ती की वारंट जारी कर दी और पुलिस ने संपत्ति कुर्क कर ली. कानपुर में सबिहा खातून के नाम पर मकान है. सबिहा का एक बेटा परहान दुबई में रहता है. पुलिस कानपुर में कुर्की करने जब पहुंची तो कामरान को पता चला और वह आकर सरेंडर कर दिया. वरीय अधिवक्ता राजेश पाठक ने बताया कि कोर्ट से इश्तेहार जारी होने के बाद 30 दिनों तक सरेंडर करने का वक्त देना होता है. इश्तेहार के जारी होने के बाद अगर आरोपित के घर से सामान उठा ले जाने जैसी बात सामने आये तो कांड के आइओ कोर्ट में शपथ पत्र देंगे कि कुर्की नहीं दी गयी तो आरोपित घर का समान लेकर भाग जायेंगे. ऐसे में शपथ पत्र के आधार पर कोर्ट कुर्की वारंट जारी कर सकती है. इस कांड में पुलिस ने कोई शपथ पत्र कोर्ट को नहीं दिया. इसे एडीजे पांच की कोर्ट ने गंभीरता से लेकर सीजेएम के आदेश को रद्द कर दिया. वरीय अधिवक्ता ने कहा कक न्यायालय के वैधानिक प्रक्रिया के पालन नहीं करने और पुलिस के अति उत्साह में उनके क्लाइंट का घर टूट गया. पिपरहिया गांव में 30 जून की सुबह मुर्गी लेयर फार्म के मजदूर की अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी. वारदात के बाद हथियार लहराते हुए अपराधी फरार हो गये. घटना की वजह आपसी रंजिश बतायी जा रही है. मृत मजदूर पश्चिम चंपारण के लक्ष्मीपुर गांव के निवासी आनंद महतो का पुत्र 21 वर्षीय गुड्डू महतो था. फार्म मालिक से 20 लाख रुपये मांगे गये थे, जिसके बाद घटना को अंजाम दिया गया. बताया जाता है कि बरौली थाने के नवादा गांव निवासी इमरान आलम से सीवान के बड़हरिया थाना क्षेत्र के सुरहिया गांव निवासी अपराधी फरहान अली ने 12 जून को फोन कर 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गयी थी. रंगदारी की रकम नहीं चुकाने पर 14 जून को दोबारा धमकी दी गयी. फिर 26 जून को रंगदारी मांगे जाने के बाद पीड़ित ने बरौली थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी. पुलिस मामले की जांच कर रही थी कि बाइक सवार अपराधियों ने 30 जून की सुबह पिपरहिया गांव में इमरान आलम के अंडा लेयर फार्म पर पहुंचकर चंपारण के मजदूर की गोली मारकर हत्या कर दी.

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