बैंक में रिश्वत मांगने पर आक्रोिशत थे छात्र!

Published at :24 Jun 2016 5:04 AM (IST)
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बैंक में रिश्वत मांगने पर आक्रोिशत थे छात्र!

पुलिस के सामने छात्रों ने लगाया 40 हजार रिश्वत मांगने का आरोप रिश्वत नहीं देने के कारण दो माह से फाइल को दबा कर बैठे थे अधिकारी पूछताछ करने पर मां-बाप काे गाली देने का भी लगाया आरोप गोपालगंज : उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक का कारनामा हर दिन उजागर हो रहा है. कहीं बैंक के […]

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पुलिस के सामने छात्रों ने लगाया 40 हजार रिश्वत मांगने का आरोप

रिश्वत नहीं देने के कारण दो माह से फाइल को दबा कर बैठे थे अधिकारी
पूछताछ करने पर मां-बाप काे गाली देने का भी लगाया आरोप
गोपालगंज : उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक का कारनामा हर दिन उजागर हो रहा है. कहीं बैंक के कर्मियों से मिलीभगत कर फर्जीवाड़ा कर लोन ऐसे लोगों के नाम पर लोन उठा लिया, जिनको पता तक नहीं है. उसी कड़ी में गत मंगलवार को बैंक के रिजनल कार्यालय में एजुकेशन लोन के लिए पहुंचे छात्रों से 40 हजार रुपया रिश्वत मांगे जाने पर झड़प की घटना होने की बात सामने आ रही है. छात्रों ने रिश्वत देने से इनकार किया तो उनकी फाइल को उठा कर फेंक दिया गया. पुलिस के पूछताछ के दौरान छात्रों ने यह गंभीर आरोप बैंक के क्रेडिट मैनेजर अरविंद पांडेय पर लगाया है.
पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान छात्र झझवा गांव के रहनेवाले अवकाश कुमार तथा उमेश ठाकुर ने कहा है कि मुन्नु कुमार सिंह के मर्चेंट नेवी में तीसरा वर्ष चल रहा था. एजुकेशन लोन के लिए कोइनी ब्रांच में आवेदन दिया था. सात माह दौड़ने के बाद कोइनी ब्रांच से मंजूरी के लिए रिजनल आॅफिस में भेजा गया था. जहां दो माह से क्रेडिट मैनेजर 40 हजार रिश्वत के लिए फाइल को दबा कर बैठे थे, तब उनसके पूछताछ करने के लिए हम सभी लोग पहुंचे, तो पहले फाइल उठा कर फेंक दिये. उसके बाद गाली देने लगे. इतना ही नहीं मना करने पर हाथ चला दिया गया, उसके बाद हमलोगों ने भी पीटा. छात्रों ने कहा कि बैंककर्मियों ने मिल कर बेरहमी से हमलोगों की पिटाई की. बाद में पुलिस को सौंप दिया.
पुलिस के सामने छात्रों ने कहा कि कैरियर की उम्मीद में बैंक गये थे ताकि हमलोगों की फरियाद को अधिकारी सुनेंगे. लेकिन करप्शन ने अधिकारियों को अंधा बना दिया. उलटे जेल जाना पड़ रहा है. ऐसी स्थिति में पूरे भारत में छात्रों को एजुकेशन लोन देने का ढिंढोरा पीटनेवाले सरकार का असली चेहरा सामने आया है. ऐसे हालात में बिहार में जन्म लेना ही अब पाप है. आत्महत्या करना ही मजबूरी है.
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के क्रेडिट मैनेजर अरविंद पांडेय ने कहा है कि मुनमुन सिंह झझवा का रहनेवाला दिन के 12 बजे आॅफिस पहुंचा, जहां उसने शिक्षा ऋण से संबंधित हासिल किया. चार लाख से ऊपर का ऋण लेने में सिक्यूरिटी की बात बतायी गयी. उसने सिक्यूरिटी की बात सुनते ही आग बबूला हो कर बाहर निकल गया. 10-15 मिनट के बाद तीन- चार अन्य लड़कों के साथ पहुंचा और मुझ पर कुरसी से हमला कर दिया. इससे बैंक का सीपीयू, मॉनीटर, टेबल, शीशा आदि क्षतिग्रस्त हो गया. 88 हजार की क्षति बैंक को हो गया है. मुख्यालय के पदाधिकारी और अन्य सहकर्मी दौड़ कर आये, तब जान बची. भागते हुए छात्रों के हाथ में लंबा-लंबा चाकू था, जो चाकू लहराते हुए धमकी देते हुए भाग निकले. हालांकि नीचे जाने के क्रम में दो लोग पकड़े गये.
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