ढूंढ़ने से भी नहीं मिल रहा सरकारी दर पर यूरिया, िकसान परेशान

Updated at :13 Jan 2016 3:14 AM
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ढूंढ़ने से भी नहीं मिल रहा सरकारी दर पर यूरिया, िकसान परेशान

गोपालगंज : रबी सिंचाई का मौसम चल रहा है. सिंचाई के बाद किसान यूरिया के लिए परेशान हैं. जिले में सरकारी दर पर मिलनेवाला यूरिया ढूंढ़ने से भी नहीं मिल रहा है. ऐसे में कालाबाजारी के कारण किसान महंगाई की दोहरी मार झेलने को विवश हैं. जिले में रबी सत्र के लिए 20 हजार पांच […]

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गोपालगंज : रबी सिंचाई का मौसम चल रहा है. सिंचाई के बाद किसान यूरिया के लिए परेशान हैं. जिले में सरकारी दर पर मिलनेवाला यूरिया ढूंढ़ने से भी नहीं मिल रहा है. ऐसे में कालाबाजारी के कारण किसान महंगाई की दोहरी मार झेलने को विवश हैं. जिले में रबी सत्र के लिए 20 हजार पांच सौ मीटरिक टन (एमटी) यूरिया की आवश्यकता है. इसके एवज में अब तक 9 हजार 21 मीटरिक टन यूरिया जिले को उपलब्ध हुआ है.

उपलब्ध यूरिया में 85 सौ 21 मीटरिक टन बांट देने का दावा कृषि विभाग कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि यह किसे दिया गया, किसी को पता नहीं है. किसानों की मानी जाये, तो सरकारी दर पर मिलनेवाला यूरिया दुकानों तक सिमट कर रह जाता है. वितरण किये गये नामों की जांच करायी जाये, तो चल रहे काले धंधे की पोल खुल जायेगी. सरकारी नियमानुसार 325 से 330 रुपये प्रति बोरे की दर से यूरिया बेचना है, जबकि बाजार में 375 से 450 रुपये प्रति बोरा बेचा जा रहा है. कालाबाजारी का यह खेल सरेआम जारी है, लेकिन कृषि विभाग चुप्पी साधे हुए है.

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