16 साहबों से नहीं वसूल हुआ 51500 अर्थदंड
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Dec 2015 6:30 PM
16 साहबों से नहीं वसूल हुआ 51500 अर्थदंड सेवा के अधिकार अधिनियम में अर्थदंड बना मखौलअर्थदंड लगने के बाद हुआ साहब का तबादलाअर्थदंड की राशि रिकवर करने में छूट रहा पसीनाप्रभात पड़तालसेवाओं का अधिकार अधिनियम (आरटीपीएस) के तहत सभी प्रकार के प्रमाणपत्रों को निर्गत किये जाने के लिए अवधि का निर्धारण भी किया गया. कार्यों […]
16 साहबों से नहीं वसूल हुआ 51500 अर्थदंड सेवा के अधिकार अधिनियम में अर्थदंड बना मखौलअर्थदंड लगने के बाद हुआ साहब का तबादलाअर्थदंड की राशि रिकवर करने में छूट रहा पसीनाप्रभात पड़तालसेवाओं का अधिकार अधिनियम (आरटीपीएस) के तहत सभी प्रकार के प्रमाणपत्रों को निर्गत किये जाने के लिए अवधि का निर्धारण भी किया गया. कार्यों में कोताही बरतने पर अपील की भी व्यवस्था की गयी. अधिकारियों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए अर्थदंड का प्रावधान भी लागू किया गया. अर्थदंड कानून जिले में मखौल बन कर रह गया है. इस कानून को किस तरह से फाइल में उलझा कर रखा गया है, उस पर प्रस्तुत है यह रिपोर्ट. संवाददाता, गोपालगंज यहां तो कानून को ही साहब चकमा दे रहे हैं. बात सोलह आना सच है. लोक सेवा अधिकार अधिनियम के तहत जिले के 16 अधिकारियों पर अर्थदंड किया गया. राशि जमा करने की बारी आयी, तो अधिकारी अर्थदंड जमा करना उचित नहीं समझे. इस बीच इनका सरकार ने तबादला कर दिया. राशि वसूलने में जिला प्रशासन सक्षम नहीं हो पा रहा है. या यूं कहें कि कानून के लोच को लेकर पूरे प्रकरण को फाइलों में दबा कर रखा गया है. राशि कैसे वसूल होगी सक्षम अधिकारियों को भी नहीं पता. या साहब को बचाने के लिए कानून को अधिकारी जानना नहीं चाहते हैं. बता दें कि वर्ष 2011 में 15 अगस्त को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रखंडों में बिचौलियों के वर्चस्व को समाप्त करने के लिए लोेग समय से आरटीपीएस के मामलों का निष्पादन नहीं किये जाने पर अर्थदंड का प्रावधान किया. ऐसे में समय पर काम पूरा नहीं करनेवाले वर्ष 2011 से अब तक 16 पदाधिकारियों पर 51500 रुपये का अर्थदंड लगा है, जबकि पदाधिकारियों के द्वारा अर्थदंड की राशि अब तक जमा नहीं की गयी है.क्या कहते हैं एक्सपर्टकानूनविद् रविभूषण श्रीवास्तव की मानें, तो सेवाओं का अधिकार अधिनियम के तहत अगर किसी अधिकारी पर अर्थदंड लगता है और उस अधिकारी का तबादला हो जाता है, तो वैसी स्थिति में पदाधिकारी के पैतृक विभाग व जिस जिले में उनका पदस्थापन हुआ है वहां के डीएम को जिला प्रशासन पत्र भेज कर राशि की रिकवरी ले सकता है. इन पदाधिकारियों पर लगा अर्थदंडपदनाम नाम दंड की राशिसीओ बैकुंठपुर वकील सिंह 4000बीडीओ बैकुंठपुर शंभुनाथ पांडेय 3000सीओ बरौली —– 2500सीओ बरौली —– 2500सीओ बरौली —– 2000राजस्व क० बरौली —— 2500सीओ बरौली राकेश कुमार 2000सीओ गोपालगंज उमेश नारायण पर्वत 5000सीओ मांझा राजेश कुमार 3000सीओ कटेया कन्हैया लाल 2000बीडीओ विजयीपुर दिनेश कुमार 4000सीओ विजयीपुर मुन्ना प्रसाद सिंह 3000बीडीओ कटेया कौशल किशोर पासवान 5000बीडीओ उचकागांव नवीन मोहन प्रसाद 2000सीओ कटेया राजेश कुमार सिंह 6250बीडीओ विजयीपुर सतीश कुमार 1750कुल ——— 51500क्या कहते हैं पदाधिकारीआरटीपीएस के आवेदनों का समय से निष्पादन नहीं किये जाने के मामले में इन पदाधिकारियों पर अर्थदंड लगाया गया है. जो पदाधिकारी अर्थदंड की राशि जमा नहीं किये हैं और उनका तबादला हो गया है, उनसे राशि वसूल किये जाने का क्या प्रावधान है. इसके लिए विभागीय गाइड लाइन का अध्ययन करेंगे, फिर कार्रवाई की जायेगी. प्रशासन हर हाल में अर्थदंड की राशि को वसूल करेगा. कृष्ण मोहन प्रसाद, स्थापना उपसमाहर्ता, गोपालगंज
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