तृणमूल में अंदरूनी कलह तेज, कुणाल घोष के पोस्ट से बढ़ीं सियासी अटकलें
Published by : Ashish Jha Updated At : 15 May 2026 12:04 PM
कुणाल घोष
Trinamool: पार्टी में भाई-भतीजावाद की राजनीति पर सवाल उठाये जा रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुणाल घोष की पोस्ट केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि तृणमूल के अंदर बढ़ते असंतोष का संकेत है. पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि उत्तर कोलकाता संगठन में असंतोष लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है.
मुख्य बातें
Trinamool: कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक रूप से सामने आ गयी है. पार्टी विधायक कुणाल घोष की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में नयी बहस छेड़ दी है. बेलियाघाटा से विधायक के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद कुणाल ने ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आत्म-मंथन की खुली चेतावनी मानी जा रही है. कुणाल घोष ने अपने पोस्ट में पूर्व तृणमूल नेता तापस राय और सजल घोष का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी उन्हें रोकने में विफल रही.
तापस राय का पार्टी छोड़ना दुखद
कुणाल घोष ने लिखा कि तापस राय लंबे समय तक उनके बड़े भाई और मार्गदर्शक रहे हैं तथा उन्हें तृणमूल में बनाये रखने के लिए हरसंभव प्रयास किये गये थे, लेकिन अंततः वे भाजपा में शामिल हो गये. विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर के रूप में तापस राय ने ही नये विधायकों को शपथ दिलायी. वहीं इस बार तापस राय ने मानिकतला सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की है. जबकि, सजल घोष ने भी भाजपा के टिकट पर बरानगर सीट से विजय हासिल की.
नेताओं को पार्टी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा
कुणाल घोष ने अपने पोस्ट में लिखा- तापस-दा और सजल घोष जैसे नेताओं को पार्टी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका. आज वे विधायक हैं और मैं अब भी तृणमूल कांग्रेस का एक सिपाही बनकर संघर्ष कर रहा हूं. उन्होंने पार्टी के भीतर भाई-भतीजावाद और व्हाट्सऐप पर रोने-धोने वाली राजनीति पर भी तीखा हमला बोला. हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे उत्तर कोलकाता से सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और उनकी पत्नी नयना बंद्योपाध्याय की ओर इशारा माना जा रहा है.
खुलकर जतायी थी नाराजगी
तापस राय के भाजपा में जाने से पहले कुणाल घोष स्वयं उनके घर पहुंचे थे. तत्कालीन मंत्री ब्रात्य बसु के साथ उन्होंने लंबी बैठक भी की थी, लेकिन तापस अपना फैसला बदलने को तैयार नहीं हुए. उस समय कुणाल ने पार्टी के भीतर एक विशेष गुट पर खुलकर नाराजगी जतायी थी, जिसके चलते उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा था. इस बीच, सजल घोष ने भी कुणाल की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, कुणाल ही एकमात्र व्यक्ति थे जिन्होंने मुझे पार्टी छोड़ने से रोकने की ईमानदार कोशिश की थी. लेकिन, आज मुझे खुशी है कि मैंने उनकी बात नहीं मानी, वरना मुझे भी ‘चोर’ कहे जाने का कलंक झेलना पड़ता.
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जानबूझकर नहीं लिया नयना का नाम
हाल ही में नयना बंद्योपाध्याय को तृणमूल विधायक दल का उपनेता बनाये जाने के बाद भी कुणाल घोष की नाराजगी सामने आयी थी. उन्होंने सार्वजनिक रूप से अन्य नेताओं को बधाई दी, लेकिन नयना का नाम जानबूझकर नहीं लिया. इसे उनके मौन विरोध के रूप में देखा जा सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुणाल घोष की पोस्ट केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि तृणमूल के अंदर बढ़ते असंतोष का संकेत है. पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि उत्तर कोलकाता संगठन में असंतोष लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है.
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लेखक के बारे में
By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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