नेट बैंकिंग के जरिये ठगी के हर तीसरे दिन शिकायत

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Dec 2015 6:25 PM

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नेट बैंकिंग के जरिये ठगी के हर तीसरे दिन शिकायतअधिकतर मामले में सिम ब्लॉक करा कर निकाले खाते से रुपये कार्टून हैगोपालगंज. आपने अपने बैंक खाते से रकम निकाली नहीं, फिर भी आपके खाते से रुपये गायब हो गये. बैंकिंग फ्रॉड के ऐसे मामलों ने खाताधारकों के साथ ही बैंकों की भी चिंता बढ़ा दी […]

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नेट बैंकिंग के जरिये ठगी के हर तीसरे दिन शिकायतअधिकतर मामले में सिम ब्लॉक करा कर निकाले खाते से रुपये कार्टून हैगोपालगंज. आपने अपने बैंक खाते से रकम निकाली नहीं, फिर भी आपके खाते से रुपये गायब हो गये. बैंकिंग फ्रॉड के ऐसे मामलों ने खाताधारकों के साथ ही बैंकों की भी चिंता बढ़ा दी है. जिले के विभिन्न थानों में हर माह नेट बैंकिंग के जरिये फ्रॉड की 8 से 10 शिकायतें दर्ज हो रही हैं. जालसाजों ने खातों से लाखों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर कर लिये. इस तरह के मामलों में साइबर पुलिस भी कुछ नहीं कर पा रही है. ऐसे में नेट बैंकिंग का उपयोग करनेवाले खाताधारक सतर्कता बरत कर ही जालसाजों से बच सकते हैं. पिछले महीने जालसाजों ने नेट बैंकिंग के जरिये हथुआ के एक रिटायर्ड शिक्षक के खाते से 12 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कर लिये. जालसाजों ने रकम ट्रांसफर करने से पहले उनकी सिम ब्लॉक कर नयी सिम इश्यू करायी थी. खाते से रुपये गायब होने की जानकारी एक सप्ताह बाद शिक्षक को मिली. इसी प्रकार विजयीपुर में एक सरकारी कर्मचारी के खाते से जालसाजों ने 42 हजार रुपये अपने खाते में ट्रांसफर किये थे. इस वारदात से पहले भी जालसाजों ने उनकी सिम ब्लॉक करके नयी सिम इश्यू करायी थी. दोनों की मामले में सायबर पुलिस अब तक आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है. ऐसे भी होती है ठगी टेली मार्केटिंग ठग क्रेडिट या डेबिट कार्डधारक का कार्ड और पिन नंबर हासिल कर लेते हैं. टेली मार्केटिंग में कार्ड और पिन नंबर बताकर खरीदारी कर लेते हैं. लॉटरी का प्रलोभन फर्जी लॉटरी खुलने का ई-मेल किया जाता है. फिर संबंधित व्यक्ति से बतौर सिक्युरिटी डिपॉजिट के नाम पर बड़ी राशि हथिया ली जाती है. वर्चुअल नंबर देश से ही विदेशी नंबर की कॉल से लॉटरी खुलने की सूचना दी जाती है. इस वर्चुअल नंबर के आधार पर सिक्युरिटी डिपॉजिट के नाम पर बड़ी राशि ली जाती है. कॉल सेंटर से हासिल करते हैं जानकारी पुलिस की अब तक की तहकीकात में आया है कि पहले तो जालसाज कॉल सेंटर से खाता धारकों और ग्राहकों का डाटा हासिल करते हैं. इसके बाद फर्जी आइडी से ईमेल कर दूसरी जानकारी लेते हैं. फिर जैसे ही बैंक अकाउंट में मोटी रकम आती है. झट से उसे अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं. मोबाइल गुम होने का आवेदन देकर नयी सिम जालसाज खाताधारक की ओर से मोबाइल गुम होने का एक आवेदन मोबाइल कंपनी में देता है. इसके बाद उक्त सिम ब्लॉक कर नसी सिम इश्यू कर दी जाती है. जालसाज अब खाते से ट्रांजेक्शन करता है तो उसके पास उक्त सिम पर ओटीपी पासवर्ड आ जाता है. फिर पासवर्ड डालकर राशि गायब कर दी जाती है. क्या कहते हैं अधिकारी इंटरनेट से जुड़े अपराध में जरूरी नहीं है कि अपराधी स्थानीय हो, वह अन्य प्रांतों के भी होते हैं. उनके द्वारा फर्जी दस्तावेजों से खाते खोले जाते हैं. पुलिस उनके ठिकानों तक पहुंच भी जाती है, लेकिन आरोपित फरार रहता है. नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करनेवालों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए. नरेश चंद्र मिश्र, मुख्यालय डीएसपी एवं साइबर सेल

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