जिले में कृषि व परिवहन की चार उपलब्धियां हमेशा रहेंगी याद
Updated at : 28 Dec 2019 7:59 AM (IST)
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गोपालगंज : वर्ष 2019 में जिले में कृषि और परिवहन की क्षेत्र में कई उपलब्धियां मिलीं. कुछ के अनुभव कड़वे रहे तो कुछ यादगार भी बने हैं, जिसे लंबे अर्से तक जिलावासी याद रखेंगे. कृषि के क्षेत्र में पहली बार 2019 में जिले के किसान का चयन अभिनव सम्मान के लिए किया गया, जो पूरे […]
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गोपालगंज : वर्ष 2019 में जिले में कृषि और परिवहन की क्षेत्र में कई उपलब्धियां मिलीं. कुछ के अनुभव कड़वे रहे तो कुछ यादगार भी बने हैं, जिसे लंबे अर्से तक जिलावासी याद रखेंगे. कृषि के क्षेत्र में पहली बार 2019 में जिले के किसान का चयन अभिनव सम्मान के लिए किया गया, जो पूरे प्रदेश में जिले के लिए गर्व की बात रही. वहीं इनपुट अनुदान ने तो किसानों के हौसले में जान डाल दिया.
जागरूकता के कारण चार किसान संघ जिले में खुल गये वहीं इनपुट अनुदान मिलने से किसानों में खेती के प्रति जोश जागृत हुआ. कुछ ऐसा ही हाल परिवहन के क्षेत्र में रहा. नये परिवहन एक्ट से वाहन चलानेवाले लोगों में लाइसेंसधारियों की संख्या में 68 फीसदी की वृद्धि हुई.
किसान पुरस्कार पाकर किसान ने बढ़ाया जिले का मान
कृषि के क्षेत्र में अपनी मेहनत की बदौलत किसान सुनिल सिंह ने अभिनव पुरस्कार पाकर अपना नाम रोशन करते हुए इस साल जिले का मान बढ़ाया है.
सुनील को यह पुरस्कार गणतंत्र दिवस पर डॉ राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चरल विवि, पूसा में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह कार्यक्रम में कुलपति आरसी श्रीवास्तव के हाथों मिला था. अभिनव किसान पुरस्कार के लिए प्रदेश के 12 किसानों का चयन किया गया था, जिसमें इस बार गोपालगंज भी अपना स्थान बनाने में सफल रहा. कुचायकोट प्रखंड के करणपुरा गांव के सुनील सिंह वर्ष 2013 से खेती को अपना कैरियर बना चुके हैं. नाबार्ड के सहयोग से सुनील किसान उत्पादन संघ प्रगति एग्रो कंपनी का रजिस्ट्रेशन 2016 में कराया.
बिके 1.27 लाख हेलमेट, 23 फीसदी घटी सड़क दुर्घटना
जिला में सड़क दुर्घटनाएं परवान पर थीं. इसमें सबसे ज्यादा बाइक से होनेवाली दुर्घटनाएं थीं. परिवहन विभाग की ओर जागरूकता अभियान चलाते हुए शनिवार को हेलमेट डे घोषित किया गया. जागरूकता अभियान से जिले में 1.27 लाख हेलमेट महज 10 माह में बिक गये और वर्तमान में 83 फीसदी बाइक चालक हेलमेट का उपयोग कर रहे हैं.
पहले इनकी संख्या महज सात फीसदी थी. जागरूकता अभियान का असर यह है कि बाइक से होनेवाली सड़क दुर्घटनाओं में 23 फीसदी की कमी आयी है. हालात यह है कि कुछ कानून के भय से तो कुछ जान जाने की डर से अब हेलमेट लगाकार चल रहे हैं. इस परिवर्तन के लिए भी यह साल याद रहेगा.
सात दिनों में िमलने लगा लर्निंग लाइसेंस, बढ़ी भीड़
नया मोटर कानून ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है. छह माह पहले जिले में महज 12 फीसदी बाइकचालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस हुआ करती थी.
नये कानून का भय और परिवहन विभाग की पारदर्शी नीति से लाइसेंस लेनेवालों की अहले सुबह से ही परिवहन विभाग में कतार लगने लगी. विभाग भी पारदर्शिता दिखाते हुए महज सात दिनों में लर्निंग लाइसेंस देना शुरू किया गया.
वर्तमान में 87 फीसदी बाइक और चारपहिया चलाने वाले के पास कम- से- कम लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस है. विभाग की ओर से आसान तरीके से मोबाइल पर परमानेंट लाइसेंस बनवाने की सूचना दी जा रही है और आवेदन करनेवाले का जांचोंपरांत लाइसेंस डाक से घर पर भेजा रहा है. 2019 खासकर परिवहन के क्षेत्र में लाइसेंस बनवानेवालों की बड़ी तादाद के रूप में जाना जायेगा.
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