कोचिंग से आ रहे छात्र को एक भाई ने पकड़ा और दूसरे ने मार दी गोली, मौत
Updated at : 04 Sep 2019 5:24 AM (IST)
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विजयीपुर : मंगलवार की सुबह धन्नु यादव हत्या के बाद आक्रोशित ग्रामीणों की भीड़ ने गोली मारनेवाले युवक के घर पर हमला कर उसकी मां की भी जमकर पिटाई कर दी. इसकी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने महिला को बचा कर हिरासत में ले लिया. बाद में प्राथमिकी में उसका नाम सामने […]
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विजयीपुर : मंगलवार की सुबह धन्नु यादव हत्या के बाद आक्रोशित ग्रामीणों की भीड़ ने गोली मारनेवाले युवक के घर पर हमला कर उसकी मां की भी जमकर पिटाई कर दी. इसकी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने महिला को बचा कर हिरासत में ले लिया. बाद में प्राथमिकी में उसका नाम सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया. छात्र धन्नु यादव हत्याकांड में उसके पिता अदालत यादव ने प्राथमिकी दर्ज करायी है. इसमें कहा गया है कि धन्नु कोचिंग से पढ़ाई कर गांव वापस आ रहा था.
इसी दौरान मुसेहरी की ओर से बाइक पर सवार हो कर मणि पांडेय का पुत्र पवन पांडेय और उसका छोटा भाई मनमोहन पांडेय आये और उसे घेर लिया. इसके बाद मनमोहन पांडेय ने धन्नु यादव को पकड़ लिया और पवन ने गोली मार दी. इस घटना में उनकी मां इंद्रावती देवी ने उनका सहयोग किया. प्राथमिकी में घटना के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है. धन्नु यादव की मौत के पीछे क्या कारण है, इस पर से पर्दा उठना अभी बाकी है.
मामले के दो आरोपित पुलिस के हिरासत में हैं. लेकिन दोनों ने अभी तक पुलिस को कुछ भी नहीं बताया है. पुलिस इस घटना को दो बिंदुओं पर जांच कर रही है. इसमें प्रेम प्रसंग का मामला तो नहीं है. आरोपित और मृतक दोनों का घर आसपास ही है. वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि तीन माह पूर्व अदालत यादव ने पुलिस को सूचना दी थी कि पवन पांडेय अवैध शराब का धंधा कर रहा है ओर अपने पास अवैध हथियार रख रहा है.
हालांकि, पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. दोनों परिवारों के बीच पैसे का लेन-देन भी बताया जा रहा है. अभी हाल ही में मणि पांडेय ने अपनी जमीन 11 लाख रुपये में बेची थी. इसके बाद पवन पांडेय ने बाइक और ट्रैक्टर खरीदा था. अपराध की दुनिया में काफी चर्चित नाम रहे धमालू पांडेय से मणि पांडेय के परिवार नाता है.
इससे पवन पांडेय और उसकी मां अक्सर लोगों पर अपराधी के रिश्तेदार होने का धौंस दिखाते थे. पवन खुद को दबंग छवि में पेश करने लगा था. दो वर्ष पूर्व धमालू पांडेय की मौत के बाद भी पवन पांडेय के लाइफ स्टाइल में कोई खास बदलाव नहीं आया. उसकी मां इंद्रावती देवी का गांव में किसी से नहीं बनता था. हालांकि, धन्नु यादव के परिवार से इस परिवार का संबंध कोई खास बुरा भी नहीं था.
धन्नु की हत्या की खबर जैसे ही गांव के लोगों को लगी ग्रामीण उग्र हो गये. इसी दौरान धन्नु का शव भी विजयीपुर पहुंच गया. शव लेकर लोग थाने पर चले गये और विजयीपुर-पगरा मुख्य मार्ग को जाम करते हुए थाने को घेर लिया.
भीड़ थाने में घुस कर पवन पांडेय को मार डालने पर उतारू थी. पुलिस के काफी समझाने के बाद भी लोग मानने को तैयार नहीं थे. बाद में एसडीओ और एएसपी ने समझाते हुए कहा कि उसे कानून से कड़ी से कड़ी सजा दिलवायी जायेगी. तब कहीं जा कर ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ, वहीं पुलिस घटना स्थल पर जाकर ब्लड सैंपल एकत्रित कर उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया.
तीन युवकों की दिलेरी से पकड़ा गया पवन
विजयीपुर थाना के मिश्र बंधौरा गांव के तीन युवकों की बहादुरी से हत्या कर भाग रहे पवन पांडेय को पकड़ लिया गया. इन्हीं तीन युवकों के हिम्मत थी कि भीड़ का कहर पूरी तरह से पवन पर नहीं टूटा. जिस समय धन्नु यादव को गोली मारने के बाद पवन पांडेय भाग रहा था. उस समय पास के ही खेत में काम कर रहे संदीप यादव, प्रभु यादव और एक युवक ने दो बाइकों से पवन पांडेय का पीछा करना शुरू कर दिया.
इन्हें इस बात का भय भी नहीं था कि भाग रहे अपराधी के पास हथियार भी है. कुछ ही दूर पीछा करने के बाद पवन पांडेय को पकड़ कर उसके पास रखे हथियार को अपने कब्जे में ले लिया और पुलिस को सूचना दी. इस दौरान कुछ लोगों ने पवन की पिटाई भी कर दी, लेकिन तीनों ने उसे भीड़ के कहर से बचाते हुए पुलिस के हवाले कर दिया. तीनों युवकों के दिलेरी की चर्चा पूरे दिन होती रही.
मौत के बाद मचा कोहराम मां का रो-रोकर बुरा हाल
धन्नु के मौत की खबर मिलते ही उसके परिजनों में कोहराम मच गया. उसकी मां सुभावती देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. सुभावती को यह उम्मीद भी नहीं थी कि गणोश चतुर्थी के दिन उसका लाल इस दुनिया से विदा हो जायेगा. वह थाने पर पहुंच गयी और पुलिस अधिकारियों से बार-बार पवन पांडेय के शव को भी साथ भेजने की बात कह रही थी. उसकी चीखें सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गयी.
पढ़ाई के बाद सीएसपी पर काम भी करता था धन्नु यादव : मृतक धन्नु यादव यूपी के भटनी स्थित एक इंटर कॉलेज का छात्र था. वह प्रतिदिन विजयीपुर में कोचिंग करने जाता था. वहां से वह आठ बजे घर के लिए लौटता था. मंगलवार को भी वहीं से लौट रहा था कि इस घटना को अंजाम दिया गया. धन्नु अपने तीन भाइयों में सबसे छोटा था. पढ़ाई में भी काफी अव्वल था. कोचिंग के बाद वह विजयीपुर के सैनिक चौक पर स्थित एक सीएसपी पर पार्ट टाइम जॉब भी करता था.
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