कोर्ट ने डीएम को हाजिर होने का िदया आदेश
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Mar 2019 6:54 AM
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गोपालगंज : आर्म्स एक्ट के मामले में सुनवाई के दौरान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पांच विश्व विभूति गुप्ता की कोर्ट ने तत्कालीन डीएम पर समन जारी करते हुए सदेह कोर्ट में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश जारी किया हैं. कोर्ट ने कहा है कि डीएम आकर बताएं कि कैसे अभियोजन की स्वीकृति […]
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गोपालगंज : आर्म्स एक्ट के मामले में सुनवाई के दौरान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पांच विश्व विभूति गुप्ता की कोर्ट ने तत्कालीन डीएम पर समन जारी करते हुए सदेह कोर्ट में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश जारी किया हैं. कोर्ट ने कहा है कि डीएम आकर बताएं कि कैसे अभियोजन की स्वीकृति दी गयी. आर्म्स एक्ट में क्लियर आदेश क्यों नहीं दिया गया.
कोर्ट ने तत्कालीन डीएम के कार्यशैली पर भी सवाल उठाया. डीएम की चूक के कारण कांड में फैसला लेने में देरी हो रही है. कोर्ट सूत्रों ने बताया कि डीएम ने आर्म्स एक्ट के जिन मामलों में अभियोजन की स्वीकृति दी है, उसमें यह दर्ज नहीं है कि कौन-कौन हथियार जब्त किये गये थे.
क्या है मामला
गोपालगंज नगर थाना कांड संख्या -26/2008 में कांड के सूचक तत्कालीन सब इंस्पेक्टर केशरीचंद्र है. केशरीचंद्र की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है, जिसमें कहा गया है कि 10 फरवरी 2008 की रात 10.55 बजे कटेया के थानाध्यक्ष रहे शर्तेंदु शरत ने मोबाइल पर सूचना दी कि कुछ अपराधी बाइक पर सवार होकर शहर में बड़ी घटना को अंजाम देने जा रहे हैं.
सूचना मिलते ही पुलिस ने थावे रोड में घोष एंड सिन्हा पेट्रोल पंप, बस स्टैंड, बंजारी चौक पर निगरानी शुरू कर दी. रात के तीन बजे घोष मोड़ तथा बंजारी बस स्टैंड से दो बाइक पर सवार छह तथा एक अपराधी को भागते हुए पुलिस ने दबोच लिया. इनके पास से भारी मात्रा में हथियार और गोली बरामद हुई. इस मामले में भोरे थाना क्षेत्र के कुख्यात मुन्ना मिश्रा, टूनटून मिश्रा, बबलु मिश्रा, आलोक सिंह, मणिकांत मिश्र, अंगद कुमार तथा राज महम्मद उर्फ राजू मियां को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया.
अभियोजन के लिए डीएम देते है स्वीकृति
कानूनी एक्सपर्ट अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी की मानें तो पुलिस किसी भी अपराधी के पास से हथियार जब्त करती है तो अभियोजन की स्वीकृति जिलाधिकारी को देना होता है. स्वीकृति पर ही मुकदमा अभियोजन पक्ष (सरकार) के तरफ से कोर्ट में सुनवाई होती है. स्वीकृति में अगर गड़बड़ी हुई तो मुकदमा रिजेक्ट हो सकता है.
कोर्ट की तरफ से जारी समन का देंगे जवाब
लोक अभियोजक देववंश उर्फ भानू गिरि ने बताया कि आर्म्स एक्ट के मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट की तरफ से तत्कालीन डीएम पर समन जारी किया गया है. समन का जवाब दिया जायेगा. यह डीएम के लिए रूटीन वर्क हैं. सीजर लिस्ट में हथियार की सूची और प्रकार दर्ज है, जिसके आधार पर केस में सजा हो सकती थी.
आर्म्स एक्ट के मामले में एडीजे पांच के कोर्ट ने जारी किया डीएम पर समन, कारण बताने का आदेश
मुकदमे में सेक्शन क्लियर नहीं होने पर कोर्ट ने जतायी नाराजगी
बड़े पैमाने पर हथियार के साथ पकड़ा गया था मुन्ना मिश्रा गैंग का सदस्य
कोर्ट में सुनवाई के दौरान 11 साल बाद सामने आयी तत्कालीन डीएम की चुक
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