नदी की उग्रता रोकेगा 41 ‘प्रोजेक्ट’
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Jan 2018 5:53 AM (IST)
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तैयारी. नारायणी के कोप से निजात दिलायेगा विभाग, खर्च होंगे 60 करोड़ मई तक बांधों को मजबूत करने का लक्ष्य विशेषज्ञों की टीम कैंप कर शुरू किया बचाव कार्य छह प्रखंडों के 3.5 लाख की आबादी हुई थी कुप्रभावित गोपालगंज : नारायणी नदी के कटाव से साल दर साल होनेवाली तबाही को रोकने के लिए […]
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तैयारी. नारायणी के कोप से निजात दिलायेगा विभाग, खर्च होंगे 60 करोड़
मई तक बांधों को मजबूत करने का लक्ष्य
विशेषज्ञों की टीम कैंप कर शुरू किया बचाव कार्य
छह प्रखंडों के 3.5 लाख की आबादी हुई थी कुप्रभावित
गोपालगंज : नारायणी नदी के कटाव से साल दर साल होनेवाली तबाही को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग ने 41 प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है. विशेषज्ञों की टीम बांधों की मरम्मत कराने के लिए कैंप कर रही है. मई तक बांधों को मजबूत करने के कार्य को पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है. इस बार गंडक नदी के तांडव को रोकने के लिए मुकम्मल इंतजाम करने की तैयारी अभी से ही शुरू हो गयी है. जल संसाधन विभाग के एक्सपर्ट क्षति का आकलन करने के बाद प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है.
जानकारों का मानना है कि गत 15 अगस्त की रात में आयी बाढ़ ने जिले के छह प्रखंडों में व्यापक तबाही मचायी थी. तटबंध पानी का दबाव पड़ते ही ताश के पत्तों की तरह बिखर गया था. बरौली के सिकटिया बांध के साथ ही बैकुंठपुर में एक दर्जन स्थानों पर लगातार तटबंध टूट गये थे. इससे 3.5 लाख की आबादी कुप्रभावित हुई थी. बाढ़ की चपेट में आने से 19 लोगों की डूबने से मौत हो गयी थी. करोड़ों की क्षति उठानी पड़ी. वैसे क्षेत्र भी कुप्रभावित हो गये, जहां कल्पना भी नहीं की जा सकती थी.
बरौली, सिधवलिया, बैकुंठपुर, कुचायकोट और मांझा प्रखंड कुप्रभावित हुआ. सदर प्रखंड में व्यापक तबाही हुई. इस तबाही के मंजर को देखने के बाद सरकार भी गंभीर होकर इसके स्थायी निदान के लिए काम शुरू किया है. मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह के नेतृत्व में अभियंताओं और विशेषज्ञों की टीम वर्क को कराने में जुटी है.
सारण तटबंध पर बनेगा कैंप : सारण मुख्य तटबंध पर कैंप कार्यालय बनाकर उसकी मरम्मती का कार्य शुरू किया गया है. 134 किमी के समीप कैंप कार्यालय बनाकर काम शुरू किया गया है. सारण तटबंध को 117 किमी से 124 किमी के बीच मरम्मत का कार्य पांच करोड़ की लागत से शुरू होना है. इसकी टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है.
तटबंध पर बनेगा चार स्लुइस गेट : गंडक नदी से इलाके को बचाने के लिए बांध पर चार अलग-अलग स्लुइस गेट लगाया जायेगा. दो स्लुइस गेट पहले से ही टूट चुका था. नदी में बाढ़ का दबाव होने पर स्लुइस गेट को खुलवा दिया जाता है. पानी का दबाव कम होने के कारण बांध को भी बचाने में सहूलियत होती है.
क्या कहते हैं अधिकारी
आनेवाले बरसात के पहले सभी 41 प्रोजेक्टों के कार्य को पूरा कर लिया जायेगा. विभाग पूरी तैयारी के साथ कार्य कराने में जुटा है. कार्य की हाई लेबल पर मॉनीटरिंग भी चल रही है.
मुरलीधर सिंह, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग
मशानथाना में होगा वेडवार का निर्माण
मशानथाना के पास सदर विधायक सुभाष सिंह की पहल पर ख्वाजेपुर तक वेडवार और ठोकर बनाने की मंजूरी मिली है. इससे नदी की धारा को तोड़ने में सहयोग मिलेगा. सदर प्रखंड में पतहरा और मशानथाना में कटाव के कारण पिछले सात-आठ वर्षों से तनाव पैदा कर रखा था. इस बार स्थायी निदान के लिए विभाग के स्तर पर काम शुरू किया गया है.
गंडक नदी ने छह गांवों का मिटा दिया वजूद
कुचायकोट के कालामटिहनिया पंचायत के वार्ड नं एक, विसंभरपुर, दलित बस्ती, भसही, हजामटोली, अहिरटोली गांव के वजूद को गंडक नदी ने मिटा दिया. इस बार नदी 16 नवंबर तक कटाव कर गांवों को उजाड़ती रही. बेघर हुए लोग पुनर्वास के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. एक हजार से अधिक परिवार के लोग आज भी सरकार की ओर उम्मीद लगाये हैं.
अब इन प्रमुख प्रोजेक्टों
पर हो रहा वर्क
विशुनपुर छरकी पर 1.40 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य
गौसिया से ख्वाजेपुर के बीच तटबंध पर प्रोटेक्शन में 3.1 करोड़ आवंटित
सारण तटबंध पर 117 से 124 किमी के बीच मरम्मत कार्य के लिए पांच करोड़ का आवंटन
दीपऊ छरकी पर ऊंचीकरण कार्य के लिए पांच करोड़ आवंटित
मटियारी बांध पर कटावरोधक कार्य के लिए 4.5 करोड़ की राशि आवंटित
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