बंगाल चुनाव में ‘किंगमेकर’ बनेंगे 1.40 करोड़ हिंदी भाषी मतदाता, 50 सीटों पर टिकी TMC और BJP की निगाहें

Published by :Mithilesh Jha
Published at :19 Apr 2026 3:41 PM (IST)
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Bengal Polls 2026 Hindi Speaking Voters King Maker

Bengal Polls 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 1.40 करोड़ हिंदी भाषी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं. आसनसोल, हावड़ा और कोलकाता की 50 सीटों पर टीएमसी और भाजपा के बीच हिंदी भाषी उम्मीदवारों की जंग तेज हो गयी है.

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Bengal Polls 2026: बंगाल चुनाव 2026 के रण में अब भाषाई समीकरणों ने जोर पकड़ लिया है. राज्य की सत्ता की चाबी किसके पास होगी, इसका फैसला इस बार बंगाल के करीब 1.40 करोड़ हिंदी भाषी मतदाता करने वाले हैं. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, राज्य की लगभग 50 से 55 विधानसभा सीटों पर हिंदी भाषी वोटर्स की भूमिका निर्णायक है.

भाजपा-टीएमसी दोनों ने लगाया एड़ी-चोटी का जोर

यही वजह है कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों ने इन मतदाताओं को रिझाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. हिंदी बेल्ट के इन वोटों को साधने के लिए दोनों ही दलों ने भारी संख्या में हिंदी भाषी चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा है.

कहां और कितनी है हिंदी भाषियों की ताकत?

पश्चिम बंगाल की कुल 10.5 करोड़ की आबादी में हिंदी भाषियों की हिस्सेदारी लगभग 1.40 करोड़ है. ये मतदाता मुख्य रूप से शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में केंद्रित हैं.

  • प्रमुख क्षेत्र : कोलकाता का बड़ाबाजार (Burrabazar), बेहाला, दमदम और हावड़ा.
  • औद्योगिक बेल्ट : आसनसोल, दुर्गापुर, रानीगंज, खड़गपुर, सिलीगुड़ी, मालदा और हुगली.
  • 24 परगना : उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के शहरी इलाकों में भी हिंदी भाषियों की घनी आबादी है.

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ममता का ‘हिंदी कार्ड’ बनाम भाजपा का ‘बिजनेस क्लास’

हिंदी भाषियों को अपने पाले में लाने के लिए दोनों दलों की रणनीतियां अलग-अलग हैं. आईए, जानते हैं.

  • TMC की रणनीति : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंदी अकादमी की स्थापना की और छठ पूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पर 2 दिन की सरकारी छुट्टी का ऐलान कर अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की है.
  • BJP की रणनीति : भाजपा ने स्थानीय व्यापारियों और हिंदी भाषी समाज के प्रभावशाली लोगों के साथ सीधा संपर्क साधा है. भाजपा का दावा है कि हिंदी भाषी जनता उनके ‘पक्के’ वोटर हैं.

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मैदान में हिंदी भाषी चेहरे, दांव पर दिग्गजों की साख

दोनों ही पार्टियों ने कई कद्दावर हिंदी भाषी उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है.

  • भाजपा के बड़े चेहरे : नोआपाड़ा से अर्जुन सिंह, भाटपाड़ा से पवन सिंह, चौरंगी से संतोष पाठक, कोलकाता पोर्ट से राकेश सिंह, उत्तर हावड़ा से उमेश राय और पांडवेश्वर से जितेंद्र तिवारी जैसे नेता मैदान में हैं.
  • TMC के प्रमुख सिपाही : बाली से कैलाश मिश्रा, जामुड़िया से हरेराम सिंह, बाराबनी से विधान उपाध्याय और जोरासांकू से विजय उपाध्याय टीएमसी की नैया पार लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

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Bengal Polls 2026: 50 सीटों पर कांटे का मुकाबला

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदीभाषी 50 सीटों पर मुकाबला काफी दिलचस्प होगा. भाजपा को उम्मीद है कि भाषाई और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण हिंदी भाषी उनके पक्ष में एकजुट होंगे, तो टीएमसी को अपने कल्याणकारी कार्यों और ‘हिंदी अकादमी’ जैसे कदमों पर भरोसा है. 23 और 29 अप्रैल को होने वाला मतदान और 4 मई का परिणाम तय करेगा कि ‘हिंदी भाषी’ दिल किसके लिए धड़कता है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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