गंडक में उफान, जगीरी टोला पंचायत भवन नदी में समाया
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Aug 2017 3:39 AM (IST)
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आपदा. विशंभरपुर में कटाव तेज, स्कूल, निर्माणाधीन बांध भी निशाने पर गंडक नदी अपने उग्र रूप में आ गयी है. नदी के रुख से सीमावर्ती इलाकों में दहशत का माहौल है. निचले इलाकों में तेजी से पानी भर रहा है. अगले 24 घंटे में चार दर्जन से अधिक गांव पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा […]
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आपदा. विशंभरपुर में कटाव तेज, स्कूल, निर्माणाधीन बांध भी निशाने पर
गंडक नदी अपने उग्र रूप में आ गयी है. नदी के रुख से सीमावर्ती इलाकों में दहशत का माहौल है. निचले इलाकों में तेजी से पानी भर रहा है. अगले 24 घंटे में चार दर्जन से अधिक गांव पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है.
गोपालगंज : गंडक नदी में आये उफान के साथ ही तबाही भी शुरू हो गयी है. शुक्रवार की दोपहर तक पश्चिमी चंपारण के बाल्मीकिनगर बराज से गंडक नदी में 1.71 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है. बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता आरके शाही ने बताया कि नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार बारिश होने के कारण गंडक में डिस्चार्ज लेवल इन दिनों बढ़ गया है, जिससे नदी के जल अधिग्रहण क्षेत्रों में उफान स्वाभाविक है.
सदर प्रखंड के जगीरी टोला का पंचायत भवन नदी में समा गया. जबकि जगीरी टोला प्राथमिक विद्यालय पर भी नदी का दबाव तेज हो गया है. मेहदिया, कटघरवा के कई टोले पानी से घिर चुके हैं. नदी में तेजी से हो रही जल वृद्धि से चार दर्जन से अधिक गांव, जो निचले इलाके में है, वहां तबाही शुरू हो गयी है. माल-मवेशी के साथ लोगों के आवागमन के रास्ते बंद हो गये हैं. जबकि सासामुसा प्रतिनिधि ने खबर दी है कि कुचायकोट प्रखंड के मालामटिहनिया पंचायत में नदी का जबरदस्त दबाव बना हुआ है. यहां विशंभरपुर के पास गंडक नदी का कटाव तेज हो गया है. लोग अपनी लहलहाती फसल को काट रहे हैं. अब तक 65 एकड़ से अधिक फसल नदी में समा चुकी है. नदी तेजी से निर्माणाधीन बांध की तरफ बढ़ रही है. कटाव से बचाव के लिए कराये गये कार्य भी नदी में समा गये हैं.
नदी का निशाना विशंभरपुर चौक, प्लस टू स्कूल, मध्य विद्यालय तथा विशंभरपुर फील्ड पर है. वहीं खरगौली और फुलवरिया के लोगों की नींद हराम हो गयी है.
ड्रेनेज मशीन बनी शो पीस : गंडक नदी की धारा को मोड़ने के लिए अहिरौली दान के समीप गंडक नदी में 20 दिन पूर्व ड्रेनेज मशीन को पूरे तामझाम के साथ उतारा गया. पर नदी में मशीन उतरने के बाद फेल कर गयी.
एक ही जगह मशीन खड़ी है. नतीजा है कि पायलट चैनल एक्टिवेट नहीं हो पा रहा और नदी का दबाव सीधे कालामटिहनिया और सलेहपुर पंचायत पर बना हुआ है. ग्रामीणों में इस मशीन के फेल होने से आक्रोश देखा जा रहा. दियारा संघर्ष समिति के संयोजक अनिल कुमार मांझी ने बताया कि पायलट चैनल के एक्टिवेट होने से कुछ दबाव कम होता, जो इस मशीन के कारण नहीं हो पा रहा है.
निचले इलाकों में फैला बाढ़ का पानी, आवागमन बाधित
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