सख्ती. कंप्यूटर में डाटा तुरंत कर रहा लाइसेंस को रिजेक्ट
गोपालगंज : तीन दशक पहले मीरगंज में रहनेवाले सुनील ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था. वर्षों उसी पर वाहन चलाया. लाइसेंस की अवधि खत्म होने के बाद पिछले चार दिन से आरटीओ कार्यालय में भटक रहे हैं. अफसरों से मिले, एक बड़े नेता का हवाला दिया, मेरा लाइसेंस नवीकरण नहीं हो रहा है, बाबू काम नहीं कर रहा है. यही शिकायत हर छोटे-बड़े अधिकारी से की गयी. बाबू को बुला कर अफसर ने डांट भी लगायी. कारण, कंप्यूटर में उनका डाटा फीड करते ही लाइसेंस रिजेक्ट हो रहा था. बाद में रेकाॅर्ड निकाला गया. पता चला कि वास्तविक उम्र 1967 है और उस समय बने लाइसेंस पर 1965 दर्ज था.
आखिरकार सुनील को नये लाइसेंस के लिए आवेदन देना पड़ा. संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में लाइसेंस नवीकरण कराने के 10 फीसदी ऐसे मामले आ रहे हैं, जो वर्षों पहले असली उम्र छिपा कर बनवाये गये थे. अब ऐसे लाइसेंस रद्द हो रहे हैं. दरअसल, पहले मैनुअल लाइसेंस बनते थे. अब आरटीओ कंप्यूटराइज्ड हो गया है. जैसे ही कंप्यूटर में डाटा डाला जाता है, वह रिजेक्ट कर देता है. पहले एक ही रजिस्टर में लाइसेंस का डाटा रहता था. मार्च, 1987 से अल्फाबेट किया जाने लगा, जबकि मार्च, 2013 से स्मार्ट कार्ड बनना लगा. माह में दर्जन भर से ज्यादा ऐसे मामले पकड़ में आ रहे हैं, जिनमें लोगों ने अपनी वास्तविक उम्र छिपा कर लाइसेंस बनवाये थे. इस संबंध में डीटीओ भूपेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि नवीकरण में पुराने लाइसेंस के 10 फीसदी ऐसे मामले आ रहे हैं, जिनमें रेकाॅर्ड में उम्र दूसरी दर्ज है, जबकि दस्तावेज में दूसरी है. ऐसे लाइसेंस ठीक नहीं किये जा सकते हैं. नया लाइसेंस बनवाने को कहा जाता है.
