मानवाधिकारी के नैतिक सिद्धांत को संरक्षित रखने की जरूरतफोटो-गया-हरिबंश-123 एएम लॉ कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी में चर्चा के दौरान प्रिंसिपल व अन्यएएम लॉ कॉलेज में मानवाधिकार दिवस पर संगोष्ठी का आयोजनसंवाददाता, गयाअनुग्रह मेमोरियल लॉ कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर मंगलवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत किया गया. कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य सह-पूर्व संकायाध्यक्ष डॉ प्रदीप कुमार ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र रोजमर्रा की जिंदगी में मानवाधिकारों के महत्व को स्वीकार करने के लिए मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है. मानवाधिकारी के नैतिक सिद्धांत जो मानव व्यवहार से संबंधित है निश्चित मानक स्थापित करता है. यह मानव अधिकार स्थानीय अंतरराष्ट्रीय कानूनों के द्वारा नियमित रूप रक्षित होते हैं. मौके पर अधिवक्ता सह-सहायक प्राध्यापक पवन कुमार मिश्रा ने कहा कि आज का दिन अंतरराष्ट्रीय महत्व का दिन है. क्योंकि, 10 दिसंबर को ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है. 10 दिसंबर 1948 को पेरिस में संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से पहली बार मौलिक मानवाधिकारों को सार्वभौमिक रूप से संरक्षित करने का प्रावधान किया गया. संगोष्ठी में प्रो कौशल किशोर द्विवेदी, प्रो अग्रसेन कुमार व कॉलेज के विधि के छात्र छात्राएं शामिल थे.

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 10 Dec 2024 9:52 PM

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गया न्यूज : एएम लॉ कॉलेज में मानवाधिकार दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन

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गया न्यूज : एएम लॉ कॉलेज में मानवाधिकार दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन

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अनुग्रह मेमोरियल लॉ कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर मंगलवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत किया गया. कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य सह-पूर्व संकायाध्यक्ष डॉ प्रदीप कुमार ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र रोजमर्रा की जिंदगी में मानवाधिकारों के महत्व को स्वीकार करने के लिए मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है. मानवाधिकारी के नैतिक सिद्धांत जो मानव व्यवहार से संबंधित है निश्चित मानक स्थापित करता है. यह मानव अधिकार स्थानीय अंतरराष्ट्रीय कानूनों के द्वारा नियमित रूप रक्षित होते हैं. मौके पर अधिवक्ता सह-सहायक प्राध्यापक पवन कुमार मिश्रा ने कहा कि आज का दिन अंतरराष्ट्रीय महत्व का दिन है. क्योंकि, 10 दिसंबर को ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है. 10 दिसंबर 1948 को पेरिस में संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से पहली बार मौलिक मानवाधिकारों को सार्वभौमिक रूप से संरक्षित करने का प्रावधान किया गया. संगोष्ठी में प्रो कौशल किशोर द्विवेदी, प्रो अग्रसेन कुमार व कॉलेज के विधि के छात्र छात्राएं शामिल थे.

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