गया जी : शेरघाटी में पंचायत समिति की बैठक गरमाई, दाखिल-खारिज और परिमार्जन में रिश्वतखोरी का मुद्दा उठा
पंचायत समिति की बैठक में शामिल अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि | Prabhat Khabar Network
गया जी के शेरघाटी में आयोजित पंचायत समिति की बैठक भ्रष्टाचार के आरोपों से गरमा गई. जनप्रतिनिधियों ने अंचल कार्यालयों में दलालों की सक्रियता और परिमार्जन, दाखिल-खारिज में रिश्वतखोरी का मुद्दा उठाया. स्वास्थ्य, शिक्षा और आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाल व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए.
गया जी के शेरघाटी प्रखंड मुख्यालय में गुरुवार को आयोजित पंचायत समिति की बैठक में अंचल कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनबाड़ी तथा अन्य विभागों की कार्यशैली को लेकर जनप्रतिनिधियों ने जमकर हंगामा किया. सदस्यों ने आरोप लगाया कि अंचल कार्यालय और राजस्व कर्मचारियों के यहां दलालों का बोलबाला है, जिसके कारण आम लोगों का बिना दलाल के कोई काम नहीं हो पाता.
मुखिया संजय सिंह ने आरोप लगाया कि परिमार्जन के नाम पर पांच से दस हजार रुपये तक की मांग की जाती है. वहीं दाखिल-खारिज और जमीन से जुड़े अन्य कार्यों में भी मनमाने तरीके से पैसे वसूले जाते हैं. सदस्य जितेंद्र चौधरी ने कहा कि बिना नजराना दिए दाखिल-खारिज के आवेदन निरस्त कर दिए जाते हैं और आम लोगों की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि जनता की समस्या लेकर अंचल कार्यालय पहुंचते हैं तो उन्हें मुकदमा दर्ज करने की धमकी दी जाती है. सदस्य संजय गुप्ता ने जाति प्रमाण पत्र बनाने में जमीन के कागजात मांगे जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे गरीब आवेदकों को परेशानी हो रही है.
उन्होंने बताया कि जाति प्रमाण पत्र के एक हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं. मुखिया राजेश यादव ने भी कर्मचारियों के दलालों पर परिमार्जन के मामलों में खुलेआम पैसे मांगने का आरोप लगाया.
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था पर सवाल
बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए गए. जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पंचायतों में संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में अनियमितता है तथा अनुमंडलीय अस्पताल की व्यवस्था बदहाल बनी हुई है. चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति नहीं रहने और मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिलने की शिकायत की गई.
सदस्यों ने कहा कि गायनिक चिकित्सक एवं महिला चिकित्सक के नहीं रहने की वजह से अस्पताल में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा कम हुआ है. वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी, पोषाहार वितरण और कई केंद्रों के नियमित संचालन पर भी सवाल उठे.
सदस्यों ने कहा कि सीडीपीओ के द्वारा नियमित रूप से केंद्रों की जांच नहीं की जाती है, जिसकी वजह से कई आंगनबाड़ी केंद्र नहीं खुलते हैं, वहीं कइयों का नियमित संचालन नहीं होता है. शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से स्कूलों में बच्चों को नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई हो इसके लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया.
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अधिकारियों की प्रतिक्रिया और बैठक में उपस्थिति
अंचलाधिकारी उषा कुमारी ने सभी आरोपों की जांच कर और दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया. बैठक में कई विभागीय अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी नाराजगी जताई गई और उनसे स्पष्टीकरण मांगने का निर्णय लिया गया.
बैठक की अध्यक्षता प्रमुख नरेश कुमार मांझी ने की. इस दौरान उप प्रमुख लालबहादुर शास्त्री, बीडीओ विनोद कुमार, सीओ उषा कुमारी, राजस्व पदाधिकारी अमित कुमार सिंह, बीइओ अमल किशोर, एमओ, मुखिया मुमताज अंसारी, सुधीर कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे.
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By Prabhat Khabar News Desk
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