आमस के मोरैनिया में एक माह के अंदर चार लोगों की मौत, पहुंची मेडिकल टीम

Published by : PRANJAL PANDEY Updated At : 07 Feb 2026 11:10 PM

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प्रखंड क्षेत्र की करमडीह पंचायत स्थित मोरैनिया के खेलावनडीह (महादलित टोला) में पिछले एक महीने के अंदर रहस्यमयी तरीके से चार लोगों की मौत होने से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है.

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आमस. प्रखंड क्षेत्र की करमडीह पंचायत स्थित मोरैनिया के खेलावनडीह (महादलित टोला) में पिछले एक महीने के अंदर रहस्यमयी तरीके से चार लोगों की मौत होने से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. मरनेवाले सभी लोग एक ही परिवार के बताये जा रहे हैं. स्थिति यह है कि लोग बीमारी को दैवीय प्रकोप मानकर अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ रहे हैं. खेलावनडीह टोला निवासी विकास मित्र रामस्वरूप रिकियासन ने बताया कि मौतों का सिलसिला पिछले महीने से जारी है. शुक्रवार को सरयू भूइयां की 22 वर्षीय पुत्री कलोनी कुमारी की मौत. दो फरवरी को उदय रिकियासन की 28 वर्षीय पत्नी शकुंतला देवी की जान गयी. 27 दिसंबर को उदय रिकियासन के मंझले भाई 35 वर्षीय रामप्रवेश मांझी की मौत हो गयी थी. इससे पूर्व शिवन भुइयां के पुत्र 32 वर्षीय संजीत भुइंया की मौत हो चुकी है. इसके अलावा रंजीत भुइयां की पत्नी टुन्नी देवी, बब्लू भुइयां की पत्नी शोभा देवी, लालचंद भुइयां की पत्नी फुलिया देवी और सरयू भुइयां अभी भी बीमार हैं.

दूषित पानी या अंधविश्वास?

विकास मित्र का कहना है कि टोले में नल-जल योजना पिछले दो वर्षों से बंद पड़ी है. मजबूरी में लोग चापाकल का दूषित पानी पी रहे हैं, जिसे बीमारी की एक बड़ी वजह माना जा रहा है. वहीं, ग्रामीणों में अंधविश्वास इतना गहरा है कि बीमार पड़ने पर वे डॉक्टर के पास जाने के बजाय ओझा-गुनी से झाड़-फूंक करवा रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार, पहले बुखार और पेट दर्द होता है, फिर अचानक कंठ (गला) जाम हो जाता है और मौत हो जाती है.

बीडीओ की पहल पर पहुंची मेडिकल टीम

शनिवार को मामले की सूचना मिलते ही आमस बीडीओ नीरज कुमार रॉय तुरंत टोले में पहुंचे. उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सूचित किया. इसके बाद हेल्थ मैनेजर अरुण कुमार रंजन, प्रभारी डॉ. किरण कुमारी, एएनएम कविता कुमारी और सुप्रिया चंचल की टीम एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंची. हेल्थ मैनेजर ने बताया कि बीमार लोगों की जांच की गयी, लेकिन प्राथमिक जांच में कोई गंभीर बीमारी सामने नहीं आई है. उन्हें दवा देकर घर भेज दिया गया है. मेडिकल टीम ने भी माना कि टोले के लोग भूत-प्रेत के भ्रम में जी रहे हैं, जिससे इलाज में देरी हो रही है.

झरी पंचायत में भी हुआ था ऐसा ही हादसा

गौरतलब है कि पिछले वर्ष प्रखंड की झरी पंचायत के बिहारी बिगहा, कोणार नगर और लालाडीह में भी दूषित पानी पीने से आधा दर्जन लोगों की मौत हो गयी थी. तब प्रशासन को वहां कैंप लगाकर स्थिति संभालनी पड़ी थी. अब खेलावनडीह में भी उसी तरह के हालात बनते देख प्रशासन अलर्ट मोड पर है.

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By PRANJAL PANDEY

मूल रूप से गोपालगंज के रहनेवाले प्रांजल पांडेय के पास पत्रकारिता का 13 वर्षों का विस्तृत अनुभव है. पिछले 12 वर्षों से प्रभात खबर से जुड़े प्रांजल, फील्ड रिपोर्टिंग और कंटेंट राइटिंग के विशेषज्ञ हैं. इसके अलावा राजनीति, खेल और सिनेमा पर भी इनकी गहरी पकड़ है.

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