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गाजीपुर के पहलवान ने जीता पहला पुरस्कार

Updated at : 16 Feb 2026 7:50 PM (IST)
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गाजीपुर के पहलवान ने जीता पहला पुरस्कार

बथानी के तेलासीन पहाड़ पर स्वर्गीय कुंती देवी दंगल प्रतियोगिता आयोजित

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बथानी के तेलासीन पहाड़ पर स्वर्गीय कुंती देवी दंगल प्रतियोगिता आयोजित

30 जोड़े पहलवानों ने लिया हिस्सा,

महिला पहलवान बनी आकर्षण का केंद्र बना

फोटो-गया-बथानी-01- कुश्ती करते पहलवान

प्रतिनिधि, नीमचक बथानीप्रखंड क्षेत्र के तेलासीन पहाड़ पर सोमवार को स्वर्गीय कुंती देवी दंगल प्रतियोगिता हुई. इसमें नालंदा, कैमूर, जहानाबाद, गया, नवादा समेत कई जिलों से 30 जोड़े पहलवानों ने भाग लिया. बिहार के अलावे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, चंदौली, बनारस से भी दंगल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पहलवान पहुंचे. दंगल में चार जोड़ी महिला पहलवानों ने हिस्सा लिया. इनमें प्रथम पुरस्कार शमशेर पहलवान, गाजीपुर उत्तर प्रदेश को ₹21000 नकदी, ट्रॉफी व मेडल देकर सम्मानित किया गया. द्वितीय पुरस्कार गोपाल यादव गिरियक नालंदा तथा राहुल पहलवान उत्तर प्रदेश के बीच ड्रा रहा. दोनों को ₹7500-7500 सौ नकदी, ट्रॉफी व मेडल देकर सम्मानित किया गया. तृतीय पुरस्कार सचिन यादव राजगीर स्टेडियम राजगीर को ₹5000 नकदी, ट्रॉफी व मेडल देकर सम्मानित किया गया. महिला में भागलपुर की आदित्य प्रिया, भागलपुर की सीमा कुमारी व झारखंड के मनीषा कुमारी विजयी रहीं, जिन्हें नकदी, ट्रॉफी व मेडल देकर सम्मानित किया गया. साथ ही अच्छे प्रदर्शन करने वाले पहलवानों को पुरस्कार दिया गया. दर्जनों पहलवान को सांत्वना पुरस्कार के रूप में मेडल प्रदान किया गया. सभी पुरस्कार अतरी के पूर्व विधायक अजय यादव, अतरी से राजद प्रत्याशी सह मुखिया वैजयंती देवी, मुखिया अर्चना सिन्हा व आयोजन कमेटी की ओर से प्रदान किया गया. दंगल प्रतियोगिता देखने के लिए दूर-दूर से हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे. आयोजन कमेटी ने बताया कि यह दंगल प्रतियोगिता का आयोजन पूर्व विधायक राजेंद्र यादव की ओर से महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर शुरू किया गया था. तब से लेकर आज तक लगातार आयोजन किया जा रहा है. यह 49वां दंगल का आयोजन किया गया. साथ ही बाहर से आये पहलवानों के लिए ठहरने का उचित प्रबंध किया जाता है. मौके पर विश्वनाथ यादव, सांसद प्रतिनिधि महेंद्र यादव, मुन्ना पाल, भूषण चौधरी, अरुण यादव समेत दर्जनों अधिकारी व जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में दर्शक उपस्थित रहे.

कुश्ती के विश्व विजेता गामा पहलवान का गया जी से रहा पुराना नाता

संवाददाता, गया जी

कुश्ती के विश्व विजेता गामा पहलवान का गया जी से पुराना नाता रहा है. शहर के रामसागर तालाब के पास स्थित सिजुआर भवन स्थित अखाड़े में आज भी उनकी कई निशानियां मौजूद हैं. 10 वर्ष की उम्र से पहलवानी शुरू करने वाले गुलाम मोहम्मद बख्श गामा पहलवान का जन्म 22 मई 1878 को अमृतसर के जब्बोवाल गांव हुआ और 1960 में पाकिस्तान के लाहौर में उनकी मृत्यु हुई. करीब 50 वर्षों तक पहलवानी में गामा पहलवान विश्व विजेता बने रहे. सिजुआर भवन की वर्तमान में देखरेख कर रहे राजेंद्र कुमार उर्फ राजन सिजुआर ने बताया कि उनके अखाड़े में कई वर्षों तक लगातार प्रत्येक वर्ष छह महीने तक गामा पहलवान रहकर दांव पेंच की प्रैक्टिस करते थे और नाम-गिरामी कई पहलवानों के साथ दांव-पेंच आजमाते हुए पटखनी देते थे. गया के अखाड़े में गामा पहलवान प्रैक्टिस की और इंग्लैंड में पहुंचकर वे विश्व चैंपियन रहे. अमेरिका के जैविशको को पटखनी दी थी. द ग्रेट गामा से विश्व प्रसिद्ध हुए गांव पहलवान अपने पूरे जीवन काल में कभी नहीं हारे. सिर्फ एक बार सात फुट के रहीम बक्स गुजरांवाला से बराबरी पर लड़ाई छूटी थी. इसमें न कोई हारा और न कोई जीता था. उन्होंने बताया कि इस अखाड़े में गामा पहलवान का दो सौ किलो वजनी गदा आज भी सुरक्षित रखा गया है.

10 बार चढ़ते थे ब्रह्मयोनि पहाड़ पर

कहा जाता है कि विश्व विजेता गामा पहलवान जब भी गया जी में रहते थे, वे प्रतिदिन एक सांस में ब्रह्मयोनि पहाड़ पर कम-से-कम 10 बार चढ़ते व उतरते थे. इसके बाद अखाड़ा में आते और एक साथ पांच हजार बैठक व दंड करते थे. साथ ही प्रतिदिन कई पहलवानों के साथ कुश्ती भी लड़ते थे. राजेंद्र सिजुआर के अनुसार गामा पहलवान को गया में लाने का श्रेय राय बहादुर गोविंद लाल सिजुआर को जाता है.

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ROHIT KUMAR SINGH

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ROHIT KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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