Gaya News : दलाईलामा के नहीं आने से पर्यटन व्यवसाय को 300 करोड़ का झटका

Gaya News : बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा का इस वर्ष बोधगया में आगमन और टीचिंग कार्यक्रम नहीं हो सका. इस वर्ष दलाईलामा ने दक्षिण भारत में अपना प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किया है.
कलेंद्र प्रताप, बोधगया़ बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा का इस वर्ष बोधगया में आगमन और टीचिंग कार्यक्रम नहीं हो सका. इस वर्ष दलाईलामा ने दक्षिण भारत में अपना प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किया है. उनका कार्यक्रम कर्नाटक के बायलाकुप्पी में हो रहा है, जहां वे जनवरी तक प्रवास करेंगे. दलाईलामा के बोधगया नहीं आने के कारण उनके अधिकतर अनुयायी और बौद्ध श्रद्धालु बोधगया की बजाय दक्षिण भारत का रुख कर गये. इसका सीधा असर बोधगया के पर्यटन व्यवसाय पर पड़ा है. एक अनुमान के अनुसार इस वर्ष बोधगया की अर्थव्यवस्था को कम से कम 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. दलाईलामा के बोधगया प्रवास के दौरान हर वर्ष नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों, तराई क्षेत्र और हिमालयी इलाकों से बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. साथ ही गेलुक पंथ के बौद्ध मठों में प्रवास करने वाले लामा, भिक्षुणियां और तिब्बती मूल के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में बोधगया आते हैं. इस वर्ष इन सभी वर्गों की आवाजाही लगभग नहीं के बराबर रही. कालचक्र मैदान में आयोजित होने वाले दलाईलामा के तीन दिवसीय टीचिंग कार्यक्रम में दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के अलावा यूरोप और पश्चिमी देशों से भी हजारों श्रद्धालु बोधगया पहुंचते रहे हैं. पूर्व के आयोजनों में आयोजन समिति द्वारा बताया जाता रहा है कि दो लाख से अधिक श्रद्धालु और लामा इन कार्यक्रमों में शामिल हुए.
दलाईलामा आते, तो दो लाख से अधिक बौद्ध श्रद्धालुओं की अतिरिक्त भीड़ जुटती
यदि इस वर्ष दलाईलामा का कार्यक्रम बोधगया में आयोजित होता, तो यहां दो लाख से अधिक बौद्ध श्रद्धालुओं की अतिरिक्त भीड़ जुटती. प्रति श्रद्धालु न्यूनतम 20 हजार रुपये के खर्च के आधार पर अनुमान लगाया जाये, तो लगभग चार अरब रुपये का व्यय बोधगया में होता. इससे होटल, गेस्ट हाउस, परिवहन, निजी आवासन, रेस्टोरेंट, फल-सब्जी, खाद्य सामग्री और पूजन सामग्रियों से जुड़े कारोबार को कम से कम 300 करोड़ रुपये का लाभ होता. इस लाभ का अभाव ही इस वर्ष नुकसान के रूप में देखा जा रहा है.बोधगया के विकास पर भी पड़ा असर
बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर आधारित बोधगया के पर्यटन व्यवसाय को होने वाले नुकसान का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और विकास पर भी पड़ता है. कोरोना काल में यह स्थिति पहले ही सामने आ चुकी है. पर्यटन से होने वाली आमदनी का उपयोग स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों के विकास में किया जाता है. इससे पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय बढ़ती है और जीवन स्तर में सुधार आता है. पर्यटन से होने वाली आय के कारण नये होटल, मॉल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है.क्या कहते हैं टूर एजेंट, होटल एसोसिएशन व परिवहन से जुड़े व्यवसायी
टूर एजेंट राजकुमार उर्फ राजमुनी ने बताया कि दलाईलामा के नहीं आने से नॉर्थ-ईस्ट और हिमालयी क्षेत्र के श्रद्धालु बोधगया नहीं पहुंचे, जिससे पर्यटन कारोबार को भारी नुकसान हुआ है. होटल एसोसिएशन से जुड़े लोगों का कहना है कि दलाईलामा का बोधगया प्रवास नहीं होने से होटल उद्योग को इस वर्ष गंभीर आर्थिक क्षति हुई है. परिवहन से जुड़े व्यवसायियों ने भी स्वीकार किया कि बोधगया को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. हालांकि बोधगया में आयोजित विभिन्न पूजा समारोहों में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही से थोड़ी बहुत चहल-पहल बनी रही और सीमित आमदनी भी हुई. इन दिनों गंगासागर और अयोध्या दर्शन पर जाने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही से फुटपाथी दुकानदारों का कारोबार किसी तरह चल रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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