गंगा के मैदानी क्षेत्र में कृषि संसाधनों पर पड़ा है जलवायु परिवर्तन का असर
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 12 Apr 2024 11:08 PM
सीयूएसबी के पर्यावरण विज्ञान विभाग (इवीएस) द्वारा बदलती जलवायु और गंगा के दर्द पर चरम घटनाएं विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया.
गया. सीयूएसबी के पर्यावरण विज्ञान विभाग (इवीएस) द्वारा बदलती जलवायु और गंगा के दर्द पर चरम घटनाएं विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि राष्ट्रीय सेमिनार को भारत सरकार के विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसइआरबी) द्वारा अनुदानित किया गया था. सेमिनार में विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों से संसाधन व्यक्तियों और प्रतिभागियों ने भाग लिया. कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह के मार्गदर्शन में समन्वयक डीन व प्रमुख प्रो प्रधान पार्थ सारथी द्वारा संकाय सदस्यों प्रो राम कुमार, डॉ राजेश कुमार रंजन, डॉ प्रशांत, डॉ एनएल देवी और डॉ सोमा गिरि के सहयोग से सेमिनार आयोजित किया गया. उद्घाटन की अध्यक्षता सीयूएसबी के कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने मुख्य अतिथि पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब), भटिंडा के कुलपति प्रो आर पी तिवारी तथा सेमिनार के संयोजक प्रोफेसर प्रधान पार्थ सारथी की उपस्थिति में किया. प्रो आर तिवारी ने गंगा के मैदानी क्षेत्र में कृषि और जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा करते हुए सूखा, बाढ़, गर्मी और शीतलहर आदि को मुख्य कारक बताया. सीयूएसबी के कुलपति जो खुद एक भूगोलवेत्ता हैं, ने जलवायु परिवर्तन और इसके परिणामों को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों को साझा किया. उन्होंने सेमिनार में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से सेमिनार के विषय पर विचार करने और पर्यावरण को बचाने में योगदान देने की अपील की.
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