पहेली बनी ''अज्ञात'' बीमारी, 33 बच्चों की जिंदगी हो गयी खत्म
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :28 Dec 2016 8:54 AM
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गया : बीते एक दशक से मगध के जिलों में बच्चों की जान लेनेवाली बीमारी जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेइ) अौर एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एइएस) ने इस साल भी कई घरों को सूना कर दिया है. मगध प्रमंडल में इस साल कुल 151 मामले सामने आये हैं, इनमें अभी तक 47 बच्चों की मौत हो चुकी है. […]
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गया : बीते एक दशक से मगध के जिलों में बच्चों की जान लेनेवाली बीमारी जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेइ) अौर एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एइएस) ने इस साल भी कई घरों को सूना कर दिया है. मगध प्रमंडल में इस साल कुल 151 मामले सामने आये हैं, इनमें अभी तक 47 बच्चों की मौत हो चुकी है. गंभीर बात यह है कि 33 मौतें किन कारणों से हुई है, यह अब तक किसी को पता नहीं है. इन कारणों से ही यह भी कहा जा सकता है कि यह साल मेडिकल एक्सपर्ट के लिए भी काफी मुश्किल भरा रहा . एक्सपर्ट सभी तरह के परीक्षण के बाद भी यह बताने में असफल रहें कि आखिर बच्चों को बीमारी कौन सी है.
पटना से लेकर नयी दिल्ली और पुणे तक के विशेषज्ञों ने कोशिश कर ली,पर हाथ कुछ भी नहीं लगा. इन 33 बच्चों के मां-बाप को पता ही नहीं चल सका कि उनके बच्चे की मौत की वजह क्या थी. मेडिकल एक्सपर्ट ने इसे ‘अज्ञात बीमारी’ का नाम दिया. कहते हैं कि जांच चल रही है. उम्मीद है कि जल्द कुछ नयी जानकारी सामने आ जायेगी. फिलहाल यह एक पहेली है.
इन सब के बीच जो सबसे बड़ा सवाल है, वह यह है कि आखिर कितने वर्षों तक यह सिलसिला जारी रहेगा. जेइ और एइएस के बाद अब यह ‘अज्ञात बीमारी’ बच्चों के जान की दुश्मन है. कब इन बीमारियों के काट तैयार होंगे? क्या कोई ऐसी व्यवस्था हो सकेगी, जिससे बच्चों की जान बचायी जा सके? सुनने में आ रहा है कि स्वास्थ विभाग ने मेडिकल काॅलेज में एक स्पेशल वार्ड को मंजूरी दी है. क्या केवल स्पेशल वार्ड बन जाने से बच्चों की जान बच जाने की गारंटी हो जायेगी? जमीनी स्तर पर सुधार कब होंगे? साफ-सफाई करनेवाले विभाग, दवा छिड़काव करने वाले विभाग, लोगों को जागरूक करने की योजनाओं पर क्या गंभीरता से काम हो सकेगा? ऐसे कई सवाल हैं जो बीते कई वर्षों से हो रही बच्चों की मौत के बाद सामने खड़े हैं. बहरहाल उम्मीद को खत्म नहीं होने देना है, उम्मीद करें कि नये साल में कुछ बेहतर हो. कुछ ऐसा हो कि अगले साल के अंत में फिर से ये सवाल खड़ा न हो.
मगध मेडिकल काॅलेज में विभिन्न जिलों से आये बीमार बच्चों की संख्या व बीमारी के कारण
गया
वजीरगंज 8 अज्ञात बीमारी,2 जेइ
खिजरसराय 2 अज्ञात बीमारी,2 जेइ
चंदौती 9 अज्ञात बीमारी,4 जेइ
फतेहपुर 2 अज्ञात बीमारी,2 जेइ
बाराचट्टी 4 अज्ञात बीमारी,3 जेइ
चेरकी 2 अज्ञात बीमारी
गुरारू 3 अज्ञात बीमारी,2 जेइ
इमामगंज 6 अज्ञात बीमारी,1 जेइ
परैया 4 अज्ञात बीमारी
डोभी 1 अज्ञात बीमारी,1 जेइ
टनकुप्पा 2 अज्ञात बीमारी
डुमरिया 2 अज्ञात बीमारी,1 जेइ
आमस 2 अज्ञात बीमारी,1 जेइ
बोधगया 4 अज्ञात बीमारी,1 जेइ
मोहनपुर 4 अज्ञात बीमारी
शेरघाटी 5 आात बीमारी,1 जेइ
कोंच 2 अज्ञात बीमारी
टिकारी 2 अज्ञात बीमारी
गुरुआ 1 अज्ञात बीमारी,1 जेइ
मानपुर 7 अज्ञात बीमारी,2 जेइ
बांकेबाजार 1 अज्ञात बीमारी,1 जेइ
अतरी 1 अज्ञात बीमारी,1 जेइ
स्पेशल वार्ड में होंगे अत्याधुनिक उपकरण
नये साल में जेई और एइएस के लिए नये वार्ड की मंजूरी मिल गयी है. विभाग ने इसके लिए हर जरूरी आदेश जारी कर दिये हैं. 10 बेडों वाले इस स्पेशल वार्ड में अत्याधुनिक उपकरण होंगे. उनकी खरीद के लिए बीएमएससीआइएल ने तैयारियां भी शुरू कर दी है. अगले साल के शुरूआत में ही निर्माण शुरू हो जायेगा.
डाॅ सुधीर कुमार सिन्हा, अधीक्षक, मगध मेडिकल काॅलेज व अस्पताल
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