बंद रहीं दुकानें, घरों में रहे कैद

Updated at :16 Jul 2016 8:25 AM
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बंद रहीं दुकानें, घरों में रहे कैद

बॉटम नाला जाम रहने के कारण दुर्गाबाड़ी व बारी रोड से पानी नहीं निकल सका. इस रोड की अधिकतर दुकानें बंद रहीं और लोग-बाग घरों में ही बंद रहे. गया : टम नाला जाम रहने के कारण नगर निगम के कई प्रयास के बाद भी दुर्गाबाड़ी व बारी रोड को जलजमाव से मुक्त नहीं कराया […]

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बॉटम नाला जाम रहने के कारण दुर्गाबाड़ी व बारी रोड से पानी नहीं निकल सका. इस रोड की अधिकतर दुकानें बंद रहीं और लोग-बाग घरों में ही बंद रहे.
गया : टम नाला जाम रहने के कारण नगर निगम के कई प्रयास के बाद भी दुर्गाबाड़ी व बारी रोड को जलजमाव से मुक्त नहीं कराया जा सका. शुक्रवार को भी सड़कें व गलियां जलमग्न रहीं और वहां की दुकानें बंद रहीं. लोग-बाग घरों में कैद रहे.
उल्लेखनीय है कि बॉटम नाले की समस्या पर आम दिनों में नगर निगम नहीं सोचता-समझता है, जबकि समस्या सालोंसाल से है. बरसात में जब दिक्कत बढ़ती है, तो निगम के पदाधिकारी तात्कालिक उपाय ढूंढ़ने लगते हैं. ऐसे में मोटर चला कर पानी निकालने लगते हैं.
इतना ही नहीं, पानी भी खुले में सड़क पर बहा देते हैं, जो दूसरे मुहल्लों की समस्या बढ़ा देता है. हालांकि, यह भी पर्याप्त नहीं है. क्योंकि, इतने दिन से मोटर चलने के बाद भी इन इलाकों को जलजमाव से मुक्ति नहीं मिल पायी है. इस इलाके के लोग कैसे रह रहे हैं, इसकी सुध लेने कोई नहीं आया. न पदाधिकारी, न ही अफसर.
लोगों का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी व नेता इस समस्या का स्थायी निदान निकालना ही नहीं चाहते. बरसात आते ही काम शुरू हो जाता है, जो चलता ही रहता है. कभी मोटर चला कर, तो कभी गड्ढा खोद कर. पानी निकालने से दूसरे मुहल्ले के लोगों को परेशानी होती है, तो गड्ढा खोदने से वहींके लोगों की मुसीबत बढ़ जाती है. लोगों का सीधा आरोप है कि इन सबके बीच पैसों का भी खूब खेल होता है.
अगर, ऐसा नहीं होता, तो कब का स्थायी काम हो गया होता. पानी निकालने के लिए इतने दिन से मोटर चलाया जा रहा है. उसके लिए डीजल फूंका जा रहा है, आखिर इसके लिए पैसे आ कहां से रहे हैं? इसका हिसाब-किताब किसके पास है? मामला तो यह है कि काम को लटकाये रखा जाये और पैसों का खेल होता रहे.
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