मोक्ष नगरी में पिंडदानियों की आस्था पर ‘जल संकट’ का खतरा, गयाजी में 334 करोड़ का रबर डैम बेअसर

Published by :kumarsuryakant
Updated at :13 May 2026 5:50 PM
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रबर डैम फाइल फोटो

Gayaji News: गयाजी में लोग अपने पितरों का पिंडदान करने पहुंचते है. लेकिन फल्गु नदी सूखे और गंदे पानी के संकट का सामना कर रही है. 334 करोड़ की लागत से बना रबर डैम का पानी भी गंदा रहने के कारण लोग के लिए उपयोग में लाना मुश्किल हो रहा है. जिससे लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है.

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Gayaji News: आस्था, परंपरा और मोक्ष की भूमि माने जाने वाले गयाजी में इन दिनों एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है. जहां एक ओर लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है. फल्गु नदी जो इस धार्मिक कर्मकांड की आत्मा मानी जाती है, आज खुद ही सूखे और गंदे पानी की समस्या से जूझ रही है.

Gayaji News: विदेशों से भी आते हैं श्रद्धालु

गयाजी में स्थित विष्णु पद मंदिर और फल्गु नदी के तट पर हर साल पितृपक्ष समेत पूरे वर्ष पिंडदान का सिलसिला चलता रहता है. देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु यहां आते हैं. लेकिन इस बार हालात ऐसे हैं कि श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान के लिए जरूरी शुद्ध पानी तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है.
स्थानीय पंडा छोटू बारीक ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “प्रकृति से छेड़छाड़ का परिणाम सामने है. पहले फल्गु का स्वरूप बेहतर था, लेकिन रबर डैम बनने के बाद इसकी चमक ही खत्म हो गई.” उनका आरोप है कि सरकार ने श्रद्धालुओं को सुविधा देने का दावा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पिंडदानी और स्थानीय लोग दोनों ही पानी के लिए तरस रहे हैं.

अनुष्ठान के लिए जरूरी शुद्ध पानी तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा

करीब 334 करोड़ रुपये की लागत से बना रबर डैम, जिसे आधुनिक तकनीक का उदाहरण बताया गया था, आज सवालों के घेरे में है. वर्ष 2022 में शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य था कि फल्गु नदी में सालभर पानी बना रहे, ताकि पिंडदानियों को सुविधा मिल सके. लेकिन गर्मी शुरू होते ही डैम का पानी या तो सूख जाता है या फिर इतना गंदा हो जाता है कि उसका उपयोग करना मुश्किल हो जाता है.
डैम में पूजा सामग्री, फूल-पत्तियां और कचरा होने से पानी दूषित हो जाता है. कई बार स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि प्रशासन को खुद ही डैम का पानी छोड़ना पड़ता है. हाल ही में अप्रैल महीने में भी पानी डाउनस्ट्रीम छोड़ दिया गया, जिसके बाद डैम पूरी तरह सूख गया.

धार्मिक मान्यता

फल्गु नदी के सूखे रहने के पीछे धार्मिक मान्यता भी है. मान्यता के अनुसार, माता सीता ने इसे ‘अंत:सलिला’ होने का श्राप दिया था. कथा के मुताबिक, भगवान राम अपने पिता दशरथ का पिंडदान करने यहां आए थे. उसी दौरान हुई एक घटना के बाद माता सीता ने फल्गु नदी को श्राप दिया, जिसके कारण यह नदी ऊपर से सूखी दिखाई देती है और इसका जल धरती के भीतर बहता है.


हालांकि आधुनिक दौर में इस पौराणिक मान्यता को चुनौती देने के लिए तकनीकी समाधान के रूप में रबर डैम बनाया गया, लेकिन वर्तमान हालात देखकर ऐसा लग रहा है कि यह प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है. लोगों का कहना है कि यह सिर्फ तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि रखरखाव की कमी और योजना के कमजोर क्रियान्वयन का नतीजा है.

स्थायी समाधान की जरूरत

करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अगर श्रद्धालुओं को बुनियादी सुविधा नहीं मिल पा रही है, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. अब जरूरत इस बात की है कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले और स्थायी समाधान निकाले. क्योंकि गयाजी की पहचान सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है. अगर फल्गु नदी और पिंडदान व्यवस्था प्रभावित होती है, तो इसका असर सीधे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा.

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