रैनबसेरों में ठहरना नहीं चाहते लोग

गया: 10 जून को मुख्यमंत्री के आगमन के दिन नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद द्वारा तीन रैनबसेरों का उद्घाटन किया गया था. इनमें दो गांधी मैदान के पास व तीसरा पंचायती अखाड़ा रेलवे पुल के पास है. इससे पहले इन रैनबसेरों का उद्घाटन 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने भी किया […]
उस वक्त भी जिला प्रशासन द्वारा गरीबों को ठहरने के सारे इंतजाम करने के दावे किये गये थे, लेकिन उद्घाटन के बाद इन रैनबसेरों को गरीबों के लिए एक भी दिन नहीं खोला गया. हां, यह जरूर हुआ कि अतिक्रमणकारियों द्वारा इन रैनबसेरों पर कब्जा कर टायर का पंक्चर बनाने की दुकान जरूर खोल ली गयी. नगर आयुक्त विजय कुमार द्वारा इन रैनबसेरों को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद उनकी तत्काल मरम्मत करा कर नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव से तीनों रैनबसेरों का उद्घाटन कराया गया. पर, करीब एक माह गुजरने के बाद भी इन रैनबसेरों में पानी व शौचालय की व्यवस्था नहीं की गयी. नगर निगम के अधिकारियों द्वारा कहा गया था कि ये रैनबसेरे गरीबों के फाइव स्टार होटल के रूप में काम करेंगे.
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