वज्रपात से किशोरी व अधेड़ की गयी जान

खिजरसराय/मोहड़ा: वज्रपात तो प्राकृतिक आपदा है. इससे होनेवाली मौत के लिए किसे दोषी ठहराया जाये. लेकिन, यह सही है कि इसकी चपेट में आने से लोगों की जान जा रही है. मानसून के इस सीजन में गया में अब तक 12 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं. […]
अभी बीते मंगलवार को ही चाकंद के पास एक मंदिर पर वज्रपात होने से एक साथ आठ लोगों की मौत हो गयी थी, जबकि आठ लोग घायल भी हो गये. गुरुवार को भी दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गयी. इनकी मौत पर सिर्फ दु:ख जताया जा सकता है. भौगोलिक चक्र में इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी, इन्हें हम रोक नहीं सकते. लेकिन, इनसे बच जरूर सकते हैं. वज्रपात, जिसे आम बोलचाल में ठनका गिरना भी कहते हैं, इनसे बचने के लिए जरूरी एहतियात बरत सकते हैं. इसके लिए हर रोज अखबारों, विज्ञापनों व प्रशासन द्वारा जरूरी टिप्स जारी किये ही जा रहे हैं. हमें उन पर ध्यान देना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए.
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