अज्ञात एइएस से सुहाना ने जीती जंग, हंसते लौटी घर

Updated at :06 Jul 2016 9:45 AM
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अज्ञात एइएस से सुहाना ने जीती जंग, हंसते लौटी घर

गया: अज्ञात एइएस से पीड़ित चार साल की सुहाना की सेहत में सुधार है. मगध मेडिकल काॅलेज अस्पताल से उसे मंगलवार की सुबह 11 बजे डिस्चार्ज कर दिया गया. डाॅक्टरों के मुताबिक, वह अब बिल्कुल ठीक है. वह सामान्य जीवन जी सकेगी. बाराचट्टी के मुरिया के मंझियावां गांव के प्रेमन मांझी अपनी बेटी सुहाना को […]

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गया: अज्ञात एइएस से पीड़ित चार साल की सुहाना की सेहत में सुधार है. मगध मेडिकल काॅलेज अस्पताल से उसे मंगलवार की सुबह 11 बजे डिस्चार्ज कर दिया गया. डाॅक्टरों के मुताबिक, वह अब बिल्कुल ठीक है. वह सामान्य जीवन जी सकेगी. बाराचट्टी के मुरिया के मंझियावां गांव के प्रेमन मांझी अपनी बेटी सुहाना को 24 जून को मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर आये थे. जांच के बाद उसे एइएस श्रेणी की बीमारी से पीड़ित बताया गया. पर, अब तक स्पष्ट नहीं हो सका कि उसे कौन सी बीमारी है.

राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट की तीन जांच रिपोर्ट, जिसमें हरपिस सिंप्लेक्स वायरस का जिक्र है, सुहाना उस सूची में नहीं है. यह उसके लिए राहत की बात है. डाॅक्टरों का कहना है कि पर्याप्त दवा देने से दोबारा किसी वायरल अटैक की संभावना काफी कम हो जाती है. बावजूद उसके अभिभावक को ध्यान रखने को कहा गया है.

.. तो पता चला कितनी गंभीर बीमारी की चपेट में है बेटी

सुहाना के पिता प्रेमन मांझी ने बताया कि उनकी चार बेटियां हैं. तीसरे नंबर की सुहाना जब बीमार हुई, तो घरवालों को लगा कि सामान्य बुखार है, ठीक हो जायेगी. पर, बुखार कम नहीं होने की स्थिति में वह गांव के ही कुछ प्राइवेट चिकित्सकों के पास गये. करीब एक हजार खर्च हो गये, पर सुहाना ठीक नहीं हुई. गांव के लोगों की सलाह पर गया शहर पहुंचे. यहां भी एक प्राइवेट डाॅक्टर के पास पहुंचे. प्रेमन बताते हैं कि डाॅक्टर के क्लिनिक में इलाज व जांच से पहले ही दो हजार रुपये जमा करने को कहा गया. इसके बाद ही उनकी बेटी के इलाज की बात कही गयी. प्रेमन के पास पैसे नहीं थे.

वह कहते हैं कि पहले ही गांव में इलाज के दौरान पैसे खर्च हो गये थे, और खर्च करना संभव नहीं था. बेटी की जान भी कीमती थी. किसी ने सलाह दी, तो मगध मेडिकल अस्पताल पहुंच गये. प्रेमन ने बताया कि यहां आने के बाद उन्हें पता चला कि उनकी बेटी कितनी गंभीर बीमारी की चपेट है. मंगलवार को बेटी के डिस्चार्ज होने के बाद वह काफी खुश थे.

इधर, राहुल की स्थिति अब भी नाजुक

बेलागंज के कानाबिगहा के राजीव पासवान का तीन साल का बेटा राहुल कुमार अब भी वेंटिलेटर पर ही है. अस्पताल सूत्रों की मानें, तो उसकी हालत बेहद नाजुक है. उम्मीद काफी कम है. हालांकि, अस्पताल प्रबंधन अब भी उसके ठीक होने का दावा कर रहा है. जानकारी के मुताबिक, राहुल का दिमाग काम नहीं कर पा रहा है, उसमें पानी भर गया है. शरीर का दायां हिस्सा भी अपंग हो गया है.

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