हाइकोर्ट पर भारी स्वास्थ्य विभाग

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हाइकोर्ट पर भारी स्वास्थ्य विभाग फोटो : मुमताज आलम का.फ्लैग — अवमानना. कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिली मुमताज को नौकरीघर में भुखमरी की स्थिति, बेटी का शादी भी रूका व बच्चे का पढ़ाई भी बंदमगध मेडिकल अस्पताल में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी था औरंगाबाद का मुमताज आलमसंवाददाता, गया मगध मेडिकल अस्पताल में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी […]

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हाइकोर्ट पर भारी स्वास्थ्य विभाग फोटो : मुमताज आलम का.फ्लैग — अवमानना. कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिली मुमताज को नौकरीघर में भुखमरी की स्थिति, बेटी का शादी भी रूका व बच्चे का पढ़ाई भी बंदमगध मेडिकल अस्पताल में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी था औरंगाबाद का मुमताज आलमसंवाददाता, गया मगध मेडिकल अस्पताल में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी पद पर तैनात रहे मुमताज आलम को पटना हाइकोर्ट द्वारा पुन: नौकरी पर बहाल करने का आदेश जारी किया गया है. हाइकोर्ट से यह आदेश मुमताज आलम की याचिका पर सुनवाई करते हुए वर्ष 2009 में ही जारी हुआ है. लेकिन, अब तक मुमताज आलम को नहीं बहाल किया गया है. इससे पता चलता है कि मगध मेडिकल अस्पताल प्रशासन द्वारा हाइकोर्ट का आदेश मानने में अनाकानी की जा रही है. गौरतलब है कि पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर औरंगाबाद के रफीगंज के रहनेवाले मुमताज आलम को मगध मेडिकल अस्पताल में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी की नौकरी मिली. जुलाई 2004 से मार्च 2005 तक बिना सूचना के अनुपस्थित रहने के कारण मगध मेडिकल अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक द्वारा मुमताज को सेवा मुक्त कर दिया. इसके बाद मुमताज पुन: बहाली के लिए पटना हाइकोट में सीडब्लूजेसी नंबर 12157/09 के माध्यम से अधीक्षक के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की. न्यायालय ने 10 मई, 2015 को मगध मेडिकल अस्पताल प्रशासन को आदेश जारी कर कहा कि मुमताज की पुन: बहाली की जाय. आदेश के बाद मुमताज ने पांच अक्तूबर, 2015 को अस्पताल में पुन: योगदान के लिए आवेदन भी दिया. मुमताज के योगदान देने के बाद तत्कालीन अधीक्षक ने निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, बिहार को पत्र लिख कर इस मामले में जरूरी निर्देश मांगा था, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई भी आदेश निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा नहीं भेजा गया. मुमताज के अनुसार योगदान देने के बाद उपस्थिति पंजी पर हस्ताक्षर नहीं बनाने दिया जाता है और ना ही योगदान की तिथि से आज तक का वेतन का भुगतान किया गया है.पूरा परिवार भुखमरी के कगार परइधर, पैसों के अभाव में मुमताज आलम का पूरा परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है. मुमताज मजदूरी कर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर रहा है. पिछले दो साल से पत्नी की बीमारी में इतना पैसा खर्च हो गया कि मुमताज को कर्ज भी ले पड़ा है. अब आलम यह है कि मजदूरी से मिले पैसे कर्ज चुकाने में ही चले जाते हैं. पैसोें के अभाव में मुमताज की बिटिया भी शादी नहीं हो पा रही है. आठ साल के बेटे की पढ़ाई छूट गयी है. अब मुमताज पुन: नौकरी पाने व बकाया वेतन के भुगतान को लेकर मुमताज कभी मगध मेडिकल अस्पताल अधीक्षक, तो कभी स्वास्थ्य निदेशक के कार्यालयों का चक्कर लगा रहा है, लेकिन दोनों जगहों से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है. होगी न्यायोचित कार्रवाई यह मामला पूर्व अधीक्षक के कार्यकाल का है. अब तक यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है. आवेदक भी इस संबंध में मुझसे कभी संपर्क नहीं किया है. अब जानकारी मिली है, तो इस मामले में न्यायोचित कार्रवाई की जायेगी.डॉ सुधीर कुमार सिन्हा, अधीक्षक, मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल.

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