साधु-संतों के सम्मान से प्रसन्न होते हैं भगवान

Updated:
विज्ञापन

साधु-संतों के सम्मान से प्रसन्न होते हैं भगवान जगतगुरु स्वामी राघवाचार्य जी महाराज का वैकुंठोत्सव महायज्ञ संवाददाता, गयाईश्वर को प्रसन्न करना है, तो साधु-संतों व ब्राह्मणों का सम्मान करें. साधु-संतों व ब्राह्मणों का सम्मान ही ईश्वर की प्रसन्नता का दूसरा रूप है. संतों का सम्मान करना पृथ्वी पर गृहस्थ धर्म है. यें बातें स्वामी राघवाचार्य […]

विज्ञापन

साधु-संतों के सम्मान से प्रसन्न होते हैं भगवान जगतगुरु स्वामी राघवाचार्य जी महाराज का वैकुंठोत्सव महायज्ञ संवाददाता, गयाईश्वर को प्रसन्न करना है, तो साधु-संतों व ब्राह्मणों का सम्मान करें. साधु-संतों व ब्राह्मणों का सम्मान ही ईश्वर की प्रसन्नता का दूसरा रूप है. संतों का सम्मान करना पृथ्वी पर गृहस्थ धर्म है. यें बातें स्वामी राघवाचार्य जी महाराज के वैकुंठोत्सव महायज्ञ के चौथे दिन शनिवार को जगतगुरु सुंदरराज स्वामी जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहीं. उन्होंने कृष्ण-सुदामा की मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि जब सुदामा अपने मित्र भगवान श्रीकृष्ण के द्वारिका पहुंचे, तो उन्हें सम्मान पूर्वक श्रीकृष्ण ने अपने सिंहासन पर बैठाया व अपने आंसुओं से उनका चरण धोया. यह मित्रता का सम्मान था. प्रवचन में श्रीकृष्ण व सुदामा के बीच हुई बातचीत व सुदामा द्वारा लाये गये चावल की पोटली को झपट कर खाने का वृतांत किया. उन्होंने इस बीच कहा कि शास्त्र में लिखा है कि जब तक तुम हमें कुछ नहीं दोगे, तब तक हम तुम्हें कुछ नहीं देंगे. गौरतलब है कि इस महायज्ञ में विभिन्न स्थानों के संतभाग ले रहे हैं व इसका नेतृत्व श्री कांची श्री प्रतिवादीभ्यंकर श्री निवासाचार्य जी महाराज व अनंत श्री विभूषित लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज कर रहे हैं.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन