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अब प्रभावती व जेपीएन अस्पताल में माता शिशुओं को नहीं पिलायेंगी बोतल का दूध

Updated at : 31 Dec 2019 8:57 AM (IST)
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अब प्रभावती व जेपीएन अस्पताल में माता शिशुओं को नहीं पिलायेंगी बोतल का दूध

गया : मां का दूध अमृत के समान है. नवजात के लिए मां के दूध के समान कोई पैष्टिक आहार नहीं हो सकता है. इस प्रकृति ने मां के दूध में नवजात के लिए उन सभी पौष्टिक तत्वों को डाला है, जो उसके लिए जरूरी होते हैं. माताओं को अपने शिशु को जन्म से छह […]

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गया : मां का दूध अमृत के समान है. नवजात के लिए मां के दूध के समान कोई पैष्टिक आहार नहीं हो सकता है. इस प्रकृति ने मां के दूध में नवजात के लिए उन सभी पौष्टिक तत्वों को डाला है, जो उसके लिए जरूरी होते हैं. माताओं को अपने शिशु को जन्म से छह माह तक नियमित स्तनपान अवश्य कराना चाहिए.

स्तनपान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शहर के प्रभावती व जयप्रकाश अस्पताल को बोतल मुक्त अस्पताल घोषित किया गया है. इसे लेकर दोनों अस्पतालों में कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
जेपीएन अस्पताल में इस मौके पर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ चंद्रशेखर प्रसाद व डॉ शहला नाजनीन सहित जिला स्वास्थ्य समिति से जिला कार्यक्रम समन्वयक शैलेंद्र कुमार व अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे. वहीं, प्रभावती अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डॉ टीएन प्रसाद व डॉ शंकुतला नाग सहित अस्पताल प्रबंधक विमलेश कुमार, यूनिसेफ प्रतिनिधि फैयाज अहमद व अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे.
नहीं होता किसी प्रकार का नुकसान
डॉ टीएन प्रसाद ने बताया कि स्तनपान कराने से मां को पीछे नहीं हटना चाहिए. फीगर खराब होने जैसी धारणा मिथ्या है और बच्चे को कभी स्तनपान से दूर नहीं रखा जाये. बिहार में हर साल डेढ़ लाख नवजात शिशु की मौत होती है. तीन साल से कम उम्र के आधे बच्चों का वजन काफी कम होता है.
ऐसे में मां का पहला गाढ़ा दूध पिलाने से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है. स्तनपान नवजात मृत्यु दर को काफी कम कर सकता है. डॉ चंद्रशेखर प्रसाद ने बताया जन्म से छह माह तक शिशु को मां के दूध के अलावा और कुछ भी देने की आवश्यकता नहीं होती है. मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है. यह बाजार के दूध की तुलना में हर हाल में बेहतर है.
अस्पतालों में बोतल वाले दूध का नहीं होगा इस्तेमाल
जिला कार्यक्रम समन्वयक ने बताया इन अस्पतालों को बोतलमुक्त घोषित किया गया है. अब यहां कोई भी मां अपने नवजात शिशु को बोतल का दूध नहीं पिलायेंगी. यह अस्पताल के सभी डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को सुनिश्चित करना है. साथ ही स्तनपान को बढ़ावा देना है. इस मौके मां के दूध से होने वाले फायदों के बारे में लोगों को जानकारी दी गयी. इस मौके पर बोतलमुक्त बनाने की जानकारी देने के लिए एक बोर्ड भी लगाया गया है. इस बोर्ड पर स्तनपान के समर्थन में लोगों ने अपने हस्ताक्षर किये.
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