मगध मेडिकल अस्पताल के ब्लड बैंक में ''खून का सूखा''

Updated at : 13 Sep 2019 7:49 AM (IST)
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मगध मेडिकल अस्पताल के ब्लड बैंक में ''खून का सूखा''

गया : संसाधन से भरपूर मगध मेडिकल ब्लड बैंक का सही लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है. बैंक में खपत के अनुपात में ब्लड नहीं होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है. इसका मुख्य कारण है कि पिछले कई महीनों से यहां ब्लड डोनरों ने रुचि दिखाना कम कर दिया है. […]

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गया : संसाधन से भरपूर मगध मेडिकल ब्लड बैंक का सही लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है. बैंक में खपत के अनुपात में ब्लड नहीं होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है. इसका मुख्य कारण है कि पिछले कई महीनों से यहां ब्लड डोनरों ने रुचि दिखाना कम कर दिया है.

चार-पांच माह पहले तक स्थिति यह होती थी कि ब्लड डोनर को यहां से लौटा दिया जाता था. अब अस्पताल प्रशासन लोगों से ब्लड डोनेशन की गुहार लगा रहे हैं. अधीक्षक विजय कृष्ण प्रसाद ने बताया कि कुछ दिनों से यहां ब्लड डोनेशन में लोगों ने रुचि नहीं दिखायी है.
इसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं व जनप्रतिनिधियों से अपील की गयी है. कुछ लोगों ने इसमें रुचि भी दिखायी है. उन्होंने बताया कि ब्लड खपत के अनुपात में उपलब्ध नहीं रहने से असुविधा हो रही है. सुधार के लिए प्रयास किये जा रहे हैं. अधीक्षक ने बताया कि दो फ्रीजर भी ब्लड बैंक के लिए मंगवाये गये हैं.
कुछ लोगों को देना पड़ता है बिना डोनेशन के ब्लड : सरकार के निर्देश के अनुसार, कई ऐसे मरीज हैं जिनको बिना डोनेशन के ही जरूरत पड़ने पर ब्लड देना तय किया गया है. इसमें थैलेसीमियां, एआइवी पॉजिटिव व एक्सीडेंट वाले लोग शामिल हैं.
यहां थैलेसीमियां के लगभग एक दर्जन से अधिक मरीज हैं. इनमें हर माह 10 से 12 यूनिट ब्लड बैंक से दिया जाता है. इतना ही नहीं एक्सीडेंट के बाद पहुंचे लोग जिनके पास कोई परिजन नहीं होता, उन्हें भी ब्लड तुरंत ही दिया जाता है, ताकि उसकी जान बचायी जा सके. कुछ दिन यहां के ब्लड बैंक की स्थिति यही रही, तो समस्या और बढ़ जायेगी.
चार्ज देने में टालमटोल : ब्लड बैंक प्रभारी डॉ नसीम अहमद को हटा कर डॉ संजय गुप्ता को प्रभारी बनाया गया. दो माह बीतने के बाद भी यहां की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया है. पहले यहां हर वक्त मरीजों की शिकायत रहती थी कि ब्लड बैंक के कर्मचारी उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं. इसके साथ ही डोनर के पहुंचने के बाद भी ब्लड डोनेशन नहीं लिया जा रहा है. इसके बाद ही यह बदलाव किया गया था.
ब्लड नहीं मिलने के कारण चली गयी जान
गया. ट्रेन से हाथ कटने पर एक व्यक्ति को बुधवार की शाम मगध मेडिकल में भर्ती कराया गया था.
उसकी पहचान नहीं हो सकी थी. अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, खून अधिक गिरने के कारण उसे ब्लड चढ़ाने की जरूरत डॉक्टरों ने बतायी. लेकिन, ब्लड बैंक में उसके ग्रुप का खून उपलब्ध नहीं था. अस्पताल कर्मचारियों ने बताया कि मरीज के साथ कोई डोनर भी नहीं था.
इस कारण ब्लड का इंतजाम नहीं हो सका. गुरुवार की सुबह उसकी मौत हो गयी. मौत के बाद जीआरपी थाने की पुलिस ने शव को 72 घंटे के लिए सुरक्षित रखवाया है. अधीक्षक ने बताया कि मरीज के ग्रुप का ब्लड उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे खून नहीं दिया जा सका होगा. लावारिस या तत्काल जरूरत वाले मरीजों को बिना डोनर के ही ब्लड उपलब्ध कराया जाता है.
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