बच्चों का पहला गुरु परिवार

Updated at : 06 Sep 2018 4:05 AM (IST)
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बच्चों का पहला गुरु परिवार

सीखना व सिखाना ही गुरु-शिष्य संबंध की मूल कड़ी : विनीत बेलागंज : प्रखंड के ओर गांव स्थित ज्ञान भारती ग्लोबल स्कूल में बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति शिक्षक डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के सम्मान में शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया. समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि सदर एसडीओ सूरज कुमार सिन्हा, स्कूल के डायरेक्टर विनीत […]

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सीखना व सिखाना ही गुरु-शिष्य संबंध की मूल कड़ी : विनीत

बेलागंज : प्रखंड के ओर गांव स्थित ज्ञान भारती ग्लोबल स्कूल में बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति शिक्षक डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के सम्मान में शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया. समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि सदर एसडीओ सूरज कुमार सिन्हा, स्कूल के डायरेक्टर विनीत कुमार, विशिष्ट अतिथि सियाशरण सिंह, कांग्रेस के प्रदेश प्रतिनिधि रजनीश कुमार व कपिलदेव शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया. इसके बाद श्री विनीत ने अतिथियों को शॉल व पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया.
समारोह में मुख्य अतिथि एसडीओ ने कहा कि बच्चे के जन्म लेने के बाद से ही उसकी शिक्षा शुरू हो जाती है. उसका पहला गुरु परिवार होता है, क्योंकि परिजन ही बच्चे को हर एक गतिविधि बताते हैं, जिसे सीखते हुए वह बड़ा होता है. इसमें अहम किरदार माता-पिता का होता है. थोड़ा बड़ा होने के बाद बच्चा पाठशाला में जाता है, जहां उसके सीखने-सिखाने का सिलसिला शुरू होता है, जो अंतिम सांस तक जारी रहता है. पाठशाला में शिक्षक बच्चे को संवारते हैं, संस्कार देते हैं और जिम्मेदार नागरिक की नींव तैयार करते हैं. इसलिए बच्चे अनुशासित होकर अपने शिक्षकों को सम्मान देते हुए शिक्षा ग्रहण करें, क्योंकि शिक्षक ही ऐसी दिशा देते हैं, जो जीवन के हर पड़ाव में साथ निभाती है. इस दौरान एसडीओ ने डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी बतायी, जिसमें उनके गांव तमिलनाडु के सर्वपल्ली से लेकर उनके राष्ट्रपति बनने तक की चर्चा की.
इस मौके पर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के बाद डायरेक्टर विनीत कुमार ने कहा कि शिक्षकों के लिए यह गौरव वर्ष 1962 में पांच सितंबर को हासिल हुआ, जब डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के सम्मान में शिक्षक दिवस के रूप में उनका जन्मदिन मनाने की शुरुआत हुई. वह पल आत्मसात करने वाला था. उनके विचारों में सीखना-सिखाना ही गुरु-शिष्य संबंध की मूल कड़ी है. यह उन्हें याद करने का जरिया भी है. इससे पहले विद्यालय के बच्चों ने मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया. यूकेजी और वर्ग एक के नन्हे-मुन्हे बच्चों ने छोटी-छोटी गइयां पर नृत्य कर सबका मन मोह लिया.
वर्ग नौ के अब्दुल वाहिद ने एकल गान व वर्ग 8-9 की छात्राओं ने समूहगान बड़े ही सधे हुए अंदाज में प्रस्तुत किया. छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत छूना है आसमान..को काफी सराहना मिली. वर्ग 7,8 एवं 9 के छात्रों द्वारा प्रस्तुत कव्वाली भर दे झोली मेरी या मुहम्मद..पर भी खूब तालियां बजीं. डेफोरेस्टेशन पर प्रस्तुत स्किट सराहनीय रहा. जा रे हट नटखट..गीत पर किया गया नृत्य बहुत ही मनमोहक रहा. चंदा चमके चम चम.. और कॉमेडी डांस ने माहैल को खुशगवार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इस मौके पर प्रिंसिपल रजनी वर्मा, कुमार अजय भूषण, अलका सिंह, आशीष नयन, जोहरा, सुभाष शर्मा सहित काफी संख्या में बच्चे, अभिभावक व शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थे. अजय भूषण के धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ.
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