गया : अंकल, बाजार से आ लहे हो तो पापा को लाये क्या

Published at :26 Apr 2018 6:39 AM (IST)
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गया : अंकल, बाजार से आ लहे हो तो पापा को लाये क्या

गया : अंकल बाजाल से आ लहे हो, पापा को लेकल आये हो क्या. पापा बजाल में होगा जब जाओगे तो लेते आना. ये बातें एक माह से अधिक समय से अपहृत चंदौती थाने के मुखबिर चंदन कुमार सिन्हा का तीन वर्ष का बेटा गौरव अपनी तोतली आवाज में बाजार से लौट कर आनेवाले हर […]

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गया : अंकल बाजाल से आ लहे हो, पापा को लेकल आये हो क्या. पापा बजाल में होगा जब जाओगे तो लेते आना. ये बातें एक माह से अधिक समय से अपहृत चंदौती थाने के मुखबिर चंदन कुमार सिन्हा का तीन वर्ष का बेटा गौरव अपनी तोतली आवाज में बाजार से लौट कर आनेवाले हर एक शख्स से पूछता है.
कुछ लोग उसे समझा देते हैं, तो कई टाल भी देते हैं. कोई भी जब कंडी नवादा स्थित चंदन के घर पहुंचता है, तो गौरव का अक्सर यही सवाल होता है. जब कोई यह कह देता है कि तुम्हारे पिता कौन हैं, तो कहता है रूतो फोतो लाते हैं. वह दौड़ता हुआ घर की छत पर बने कमरे में जाता है. वहां से वह अपने पिता चंदन का तस्वीर दोनों हाथों से सिने से लगा कर वापस लौटता है और फिर कहता है ये देथो हमाले पापा हैं.
तीन वर्षीय गौरव के इन हरकतों व सवालों के सामने कोई असहाय हो जाता है. शायद गौरव के दिमाग में फिलहाल यही चल रहा है कि कोई बाजार से आनेवाला व्यक्ति ही उसके पिता को घर वापस ला सकता है. यही वजह है कि वह हर किसी से अपने पिता के वापस लौटने की बात पूछता है. चंदन के दो बेटे व दो बेटियां हैं. सभी बच्चों की उम्र सात वर्ष से लेकर दो वर्ष के बीच की है.
सिर्फ जीने के लिए खा रहे खाना
इधर चंदन की पत्नी दिव्या सिन्हा कहती हैं कि पति के अपहरण के 35 दिन गुजर जाने के बाद भी अबतक कुछ पता नहीं चल पाया है. बाहर वालों से अधिक चारों बच्चे पिता के बारे में सवाल करते हैं. बच्चों को हर बार यही जवाब देती हूं कि पिता जल्द आ जायेंगे. अब बच्चे भी हमारे जवाब से संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने कहा कि घर में हर रोज खाना बनता है लेकिन, कोई भी मन से खाना नहीं खाता है. पति के जाने के बाद घर के लोग सिर्फ जिंदा रहने के लिए ही खाना खाते हैं. जैसे-जैसे समय बितता जा रहा है, वैसे-वैसे अब मन अनहोनी की आशंका से कांप उठता है. घर में अब मिलनेवालों की संख्या गिनती में ही रह गयी है. हर कोई आकर हमलोग से यही सवाल करता है कि कुछ पता चला, जिसका जवाब हमलोग के पास नहीं होता है. पुलिस की ओर से भी सार्थक पहल नहीं की जा रही है.
बाजार जाने की बात कह कर निकला था चंदन
गौरतलब है कि 22 मार्च को बाजार जाने की बात कह कर घर से बाइक से निकला था. उसके बाद से चंदन अब तक घर नहीं लौटा है. चंदन की बरामदगी की मांग को लेकर 23 मार्च को गया-पटना रोड को जाम कर लोगों ने विरोध जताया था. इस पर पुलिस ने चंदन को खोज निकालने का आश्वासन देकर जाम को हटवाया. कार्रवाई नहीं होता देख परिजन व गांव के लोग 27 मार्च को एसएसपी कार्यालय पहुंचे.
एसएसपी गरिमा मलिक ने आश्वासन दिया कि चंदन को जल्द खोज लिया जायेगा. इसके बाद पुलिस के दबाव में अपहरण कांड का आरोपित गुड्डू चौधरी न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया. पुलिस ने चौधरी को 72 घंटे के रिमांड पर लेकर पूछताछ की लेकिन पुलिस उससे कुछ भी जानकारी हासिल नहीं कर सकी. मामले की जांच कर रहे चंदौती थानाध्यक्ष चंद्रभानु को एक एक मामले में लाइन हाजिर कर दिया गया है. इसके बाद से पुलिस के अधिकारी सिर्फ मामले में जांच की बात करते हैं.
परिजन लगा रहे पंडित मौलवी के चक्कर
चंदन के बुढ़ी मां फूल कुमारी देवी रोते हुए कहती हैं कि सबके देख हिओ तो हमरो चंदन के याद आव हव. कुछ भी आवाज आवे पर लग हव कि हमर चंदन घर आ गेलो. दौड़ के दरवाजा पर जा हिओ. लेकिन, उहां चंदन के न देखला पर रोबे लग हिओ. उन्होंने यह भी बताया कि बेटे की तलाश में पुलिस की ओर से निराशा हाथ लगने पर चंदन के खातिर मौलवी व पंडित के दरवाजे का भी चक्कर लगाया जा रहा है. कहीं यह भी कह दिया जाता है कि अब चंदन नहीं रहा लेकिन कुछ जगहों पर यह कह कर संतोष दिया जा रहा है कि चंदन लौट आयेगा.
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