नाम के आगे ''माननीय'' चाहते हैं निगम के पार्षद

Published at :17 Jul 2017 5:35 AM (IST)
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नाम के आगे ''माननीय'' चाहते हैं निगम के पार्षद

पहल. अनुशासन के लिए बोर्ड ने जारी किया दिशा-निर्देश गया : नगर निगम में कार्यरत कर्मचारियों को अनुशासन में लाने के लिए नगर निगम बोर्ड ने पहल की है. ऐसा मेयर के 23 जून को निगम के स्टोर में जांच करने के क्रम में मौजूद कर्मचारी के कुरसी से उठ कर खड़ा नहीं होने के […]

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पहल. अनुशासन के लिए बोर्ड ने जारी किया दिशा-निर्देश

गया : नगर निगम में कार्यरत कर्मचारियों को अनुशासन में लाने के लिए नगर निगम बोर्ड ने पहल की है. ऐसा मेयर के 23 जून को निगम के स्टोर में जांच करने के क्रम में मौजूद कर्मचारी के कुरसी से उठ कर खड़ा नहीं होने के कारण की गयी है. उक्त कर्मचारी के अनुशासनहीनता को छुपाने के लिए निगम के कर्मचारियों ने मेयर पर कई तरह का आरोप लगाते हुए हड़ताल पर जाने की धमकी दी थी.
24 जून की बैठक में पारित हुआ प्रस्ताव
नगर निगम के बोर्ड की 24 जून को हुई बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया है कि निगम कार्यालय में कोई भी जनप्रतिनिधि या सम्मानित के आगमन पर उनके सम्मान में कर्मचारी उठ कर अभिनंदन करेंगे. वहीं,दूसरे प्रस्ताव में पत्राचार में मेयर, डिप्टी मेयर व पार्षदों के पद के आगे माननीय लिखा जायेगा. दाेनों प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में लिये गये अनान्य प्रस्ताव में शामिल है.
यह भी है एक कारण
लोगों का मानना है कि पिछले कई बार से निगम चुनाव में पार्षदों के विकास से अधिक ध्यान हर समय मेयर व डिप्टी मेयर को बनाने व हटाने में बीत जाता था. इस बार निर्विरोध तौर पर मेयर का चुनाव हुआ है. पूरे शहर का ध्यान निगम के द्वारा कराये जाने वाले योजनाओं पर है. ज्यादातर लोगों का मानना है कि इस बार शहर की तस्वीर नहीं बदली, तो आगे फिर कभी ऐसा मौका नहीं आयेगा. इस बार बोर्ड के माननीयों की सोच है कि शहर में कुछ ऐसा कर दिखाया जाये कि लोगों को नगर निगम का कार्य धरातल पर दिखायी पड़े.
पहले भी हो चुका है विवाद
जानकारों का कहना है कि नगर निगम गठन के बाद पार्षदों व कर्मचारियों के बीच कई बार विवाद सामने आया है. कर्मचारी के साथ मारपीट में थाने में मुकदमा भी दर्ज किया गया था. इस मुद्दे को लेकर नगर निगम में कई बार हड़ताल भी हुआ है. लोगों का कहना है कि यहां कर्मचारी व पार्षदों के आपसी वर्चस्व की लड़ाई बहुत पुरानी है. हर कोई अपना वर्चस्व कायम करने के लिए अपने ताकत का इस्तेमाल करने में पीछे नहीं हटते. कई जगहों पर आपसी वर्चस्व के कारण विकास योजनाएं भी बाधित रही है. जानकारों का कहना है कि कर्मचारी अपनी वर्चस्वता कायम रखने के लिए हड़ताल की व पार्षद बोर्ड के प्रस्ताव की धमकी देने से पीछे नहीं हटते. दोनों की लड़ाई में शहर के आम लोगों के विकास के लिए होने वाले काम बाधित होते हैं.
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