बिहार में जालसाजों ने बेल्ट्रॉन की फर्जी वेबसाइट बना कर निकाला नौकरी का विज्ञापन, मंत्री बोले- करो एफआइआर
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 23 Feb 2022 9:13 AM
अज्ञात जालसाजों के खिलाफ में शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गयी है. अब पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए साइबर क्राइम सेल की मदद ली है.
पटना. जालसाजों ने बेल्ट्रॉन की फर्जी वेबसाइट बना कर नौकरी का विज्ञापन निकाला और ठगी की कोशिश की. जालसाजों ने असली वेबसाइट से मिलते-जुलते तथ्यों को डाल दिया. मामले की जानकारी बेल्ट्रॉन प्रशासन को हो गयी और फिर परियोजना शीर्ष जाहिद लतीफ ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ में शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गयी है. अब पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए साइबर क्राइम सेल की मदद ली है.
पुलिस उस आइपी एड्रेस को तलाशने में जुट गयी है, जिससे उक्त वेबसाइट को बनाया गया है. हालांकि, उक्त आइपी एड्रेस भी फर्जी होने की आशंका जतायी जा रही है. कुछ इसी तरह की पटना हाइकोर्ट की वेबसाइट को भी जालसाजों ने बना लिया था और नौकरी का विज्ञापन निकालने के साथ ही रिजल्ट भी प्रकाशित करने लगे थे. इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी. शास्त्रीनगर थानाध्यक्ष राम शंकर सिंह ने मामला दर्ज किये जाने की पुष्टि की और बताया कि जांच की जा रही है.
जालसाज इतने शातिर हैं कि उन्होंने बेल्ट्रान का फर्जी वेबसाइट इस तरह बनाया है, जिससे वह एकदम वास्तविक लगे और देखने वाले भी समझ नहीं पाये. इसके साथ ही वास्तविक वेबसाइट की तरह ही सारी तरह के तथ्य व डिजाइनिंग भी कर दी गयी है. केवल उसके यूआरएल एड्रेस में हल्का-सा बदलाव है.
बेल्ट्रॉन की मूल वेबसाइट bsedc.bihar.gov.in है, जबकि जालसाजों द्वारा बनायी गयी वेबसाइट का यूआरएल एड्रेस bsedc.bihargov.co.in है. फर्जी वेबसाइट में बिहार डॉट जीओवी को एक साथ कर दिया गया है और डॉट को हटा दिया गया है.
इसके साथ ही उसमें नौकरी का विज्ञापन निकाल कर आवेदन तक भरने की सुविधा देकर आम लोगों से रुपये ठगने की कोशिश की जा रही थी. लेकिन इसके संबंध में कई लोगों से बेल्ट्रॉन को तुरंत जानकारी मिल गयी और फिर प्राथमिकी दर्ज करा दी गयी है.
फर्जी वेबसाइट बनाकर युवाओं से कृषि विभाग में नौकरी के लिए आवेदन मांगनी वाली वेबसाइटों के संचालकों के खिलाफ एफआइआर कराने का आदेश दिया गया है. इसकी पुष्टि कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने की है. कृषि मंत्री ने बताया कि कुछ फर्जी संस्थान पंचायत किसान मित्र एवं प्रखंड किसान मित्र के लिए आवेदन मांग कर युवाओं को ठग रहे हैं, यह मामला मेरी संज्ञान में आया था, जिसके आधार पर एजेंसी वेबसाइटों को चिह्नित कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कहा गया है.
अमरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पता चला है कि राष्ट्रीय किसान सहायता केंद्र नाम के संस्थान की तरफ से एक विज्ञापन जारी किया गया. इसमें कृषि विभाग के लोगो के साथ भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के लोगो का भी उपयोग किया गया है. यह पूरी तरह से फर्जी है.
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