निगरानी टीम के डर से जिले में रिश्वतखोर अधिकारियों व कर्मियों ने बदल लिया यहां घुस लेने का पैटर्न

निगरानी टीम के द्वारा जिले में रिश्वतखोर अधिकारियों व कर्मियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. ऐसे में रिश्वतखोर अधिकारियों व कर्मियों ने घूंस लेने का तरीका बदल लिया है. अब हर विभाग में बिचौलिये व दलाल सक्रिय हो गये हैं.
रिश्वतखोरी का बाजार प्राय: हर सरकारी दफ्तरों पर इस कदर सज गया है कि अधिकारियों व कर्मियों ने घुस लेने का पैटर्न ही बदल दिया है. मानदेय भुगतान को ले 13 हजार 500 रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाते हुए निगरानी विभाग की टीम ने नगर के शिवगंज मुहल्ले के पर्यवेक्षिका पति राजेश गुप्ता को भले ही गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन कई ऐसे घुसखोर अधिकारी हैं, जो बदले हुए पैटर्न पर काम कर रहे हैं. ऐसा करने वाले अधिकरियों व कर्मियों की तायदाद यहां बढ़ती जा रही है.
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्राय: हर जगह तथाकथित दलाल व बिचौलिये सक्रिय हैं. कई विभागों के हाकिम को किस काम के एवज में कितना रकम चाहिए, ये उनसे पहले बिचौलिये व दलाल बता देते हैं. थाना से लेकर अनुमंडल, प्रखंड, अंचल, आइसीडीएस, आपूर्ति, नगर परिषद, अस्पताल समेत हर जगह बिचौलिये सक्रिय हैं और भोले भाले लोग इनका शिकार होते रहे हैं. यहीं नहीं थाना से लेकर कमोबेश हर सरकारी दफ्तर में अपनी खास पैठ बना चुके रसूखदार कौन कितना रुपये किस काम के बदले में दे सकता है, अधिकारियों व संबंधित कर्मियों को ये पहले ही बता देते हैं. हालांकि इनमें वे जरूरतमंद भी शामिल हैं, जिन्हें उस वक्त तक भरोसा नहीं होता, जब तक कि वे मोटी रकम नहीं दे देते. हाकिम व कर्मियों को तो नोटो की गड्डी से मतलब है, जितना कमाना हैं, कमा लें. हर किसी को निगरानी थोड़े ही पकड़ती है. रिश्वतखेरी व दलाली के लिए अपने चहेते तो है ही. साल दो साल बाद अगर कोई रिश्वतखोरी में पकड़ता भी है तो कौन इसका टेंशन ले सब जायज है.
निगरानी की धमक यहां पहली बार वर्ष 2011 में हुई, जब निगरानी कोर्ट में दायर एक वाद के मामले में वारंटी तत्कालीन इओ दिनेश मालवीय और कर्मी नंदकिशोर मिश्र को निगरानी टीम ने पांच हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार किया. फिर छह साल बाद वर्ष 2018 के नवंबर माह में शिकारपुर थाना परिसर से निगरानी विभाग की टीम ने एएसआई संतोष राम को मारपीट के एक मामले में जनता देवी से 40 हजार रुपये घुस लेते रंगे हाथ गिरफ़्तार किया. हालांकि इसके अगले ही वर्ष 2019 के 13 नवंबर को 50 हजार रुपए घुस लेते नप इओ सुधीर कुमार को निगरानी की टीम ने गिरफ्तार किया था. इओ पर डोर टू डोर कचरा उठाव को लेकर संवेदक उमेश प्रसाद से 4.50 लाख रुपये मांगने की शिकायत थी. तीन साल बाद 3 अगस्त गौनाहा की पर्यवेक्षिका पति राजेश गुप्ता 13 हजार 500 के साथ गिरफ्तार किये गये.
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