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इमरजेंसी भी जेपी के जज्बे को न रोक सकी, पिछड़ों-दलितों को समर्पित रहा लोकनायक का जीवन, छपरा में बोले शाह

Updated at : 11 Oct 2022 7:57 PM (IST)
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इमरजेंसी भी जेपी के जज्बे को न रोक सकी, पिछड़ों-दलितों को समर्पित रहा लोकनायक का जीवन, छपरा में बोले शाह

अमित शाह ने कहा कि जेपी सारी जिंदगी देश की आजादी के लिए लड़े. उनका पूरा जीवन भूमिहीन, पिछड़ों, दलितों के हितों को समर्पित रहा. जब सत्ता लेने की बात आयी, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया. श्री शाह ने कहा कि 70 के दशक में सत्ता के मद में चूर एक सरकार ने देश में इमरजेंसी लगायी, तो जेपी ने इसके खिलाफ आवाज उठायी.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि आपातकाल (इमरजेंसी) भी जेपी के जज्बे को न रोक सकी. लोकनायक जय प्रकाश नारायण का जीवन पिछड़ों एवं दलितों को समर्पित रहा. केंद्रीय गृह मंत्री ने ये बातें छपरा में कहीं. उन्होंने कहा कि जो लोग आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सिद्धांतों को छोड़कर कांग्रेस की गोद में जाकर बैठ गये हैं, उनके खिलाफ दिल खोलकर नारा लगाइए.

जेपी की जयंती पर पूरा हो रहा है हमारा प्रण

उन्होंने कहा कि मैं जयप्रकाश नारायण की इस महान जन्मभूमि पर आया हूं. यहां जो आदमकद से भी ऊंची प्रतिमा लगायी गयी है, उसका प्रण हमारी सरकार ने किया था. कैबिनेट में इसका प्रस्ताव पास किया. आज वह प्रण जेपी की जयंती पर पूरा हो रहा है. गृह मंत्री अमित शाह छपरा में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उनकी मूर्ति के अनावरण के बाद एक जनसभा में कहीं.

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जेपी के नेतृत्व में पहली बार देश में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी

अमित शाह ने कहा कि जेपी सारी जिंदगी देश की आजादी के लिए लड़े. उनका पूरा जीवन भूमिहीन, पिछड़ों, दलितों के हितों को समर्पित रहा. जब सत्ता लेने की बात आयी, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया. श्री शाह ने कहा कि 70 के दशक में सत्ता के मद में चूर एक सरकार ने देश में इमरजेंसी लगायी, तो जेपी ने इसके खिलाफ आवाज उठायी.

गुजरात में चली गयी चिमनभाई पटेल की सत्ता

अमित शाह ने कहा कि वर्ष 1973 में गुजरात में इंदिरा गांधी की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार थी, जिसके मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल थे. वहीं, बिहार में अब्दुल गफ्फार मुख्यमंत्री थे. उस समय भ्रष्टाचार को रोकने के लिए गुजरात के विद्यार्थियों ने आंदोलन शुरू किया, उसका नेतृत्व जेपी ने किया और गुजरात में सत्ता बदल दी.

जेपी के आंदोलन से छूटे इंदिरा गांधी के पसीने

इसके बाद बिहार के गांधी मैदान में आंदोलन किया, जहां की भीड़ देखकर इंदिरा गांधी के पसीने छूट गये और उन्होंने देश में इमरजेंसी लगाकर जेपी को जेल में डाल दिया. वर्ष 1942 के आंदोलन में जिस व्यक्ति को हजारीबाग की जेल न रोक सकी, उस जेपी को इंदिरा गांधी की तत्कालीन सरकार भी नहीं रोक सकी. जब इमरजेंसी खत्म हुई, तो जेपी ने पूरे विपक्ष को एक किया और पहली बार देश में गैर कांग्रेसी सरकार बनाने का काम किया.

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मोदी सरकार ने अपनाये जेपी के सिद्धांत

अमित शाह ने कहा कि जेपी और विनोबा भावे के सर्वोदय के सिद्धांत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अपना रही है. हर घर में राशन, बिजली, गैस कनेक्शन और हर गांव को सड़क से जोड़ने का काम मोदी सरकार कर रही है. जेपी के संपूर्ण क्रांति के नारे को सफल बनाने में प्रधानमंत्री मोदी जुटे हुए हैं. उनके नेतृत्व में गरीबों का जीवन स्तर सुधारने का काम हो रहा है.

कांग्रेस की गोद में बैठ गये जेपी के अनुयायी: अमित शाह

श्री शाह ने कहा कि वर्ष 1974 में जेपी ने बिहार में राजनीतिक आंदोलन किया, तो सभी विचारधारा के विद्यार्थियों ने उस आंदोलन में सहयोग किया. आज मैं बिहार से पूछ रहा हूं कि जेपी के आंदोलन से निकलकर राजनीति करने वाले नेता आज सत्ता के लिए कांग्रेस की गोद में बैठ गये, क्या आप उनसे सहमत हैं? ऐसे में बिहार की जनता को तय करना है कि जेपी के सिद्धांतों पर चलने वाली प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सरकार चाहिए या जेपी के सिद्धांतों से भटककर सत्ता के लिए समझौता करने वाली गठजोड़ की सरकार चाहिए.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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