तुलसी ने सामाजिक विकास की बाधा को समन्वयवाद की राह चलकर किया निदान
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 17 Aug 2024 11:52 PM
एमएलएसएम कॉलेज, दरभंगा में हिंदी विभाग की ओर से तुलसी जयंती सप्ताह समारोह के समापन पर शनिवार को "तुलसी की सामाजिक दृष्टि " विषय पर संगोष्ठी हुई
दरभंगा. एमएलएसएम कॉलेज, दरभंगा में हिंदी विभाग की ओर से तुलसी जयंती सप्ताह समारोह के समापन पर शनिवार को “तुलसी की सामाजिक दृष्टि ” विषय पर संगोष्ठी हुई. प्रधानाचार्य डॉ शंभू कुमार यादव की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में डॉ तीर्थनाथ मिश्र ने तुलसी के व्यक्तित्व और कृतित्व की विशेषताओं को उद्घाटित किया. कहा कि महाकवि ने सामाजिक विकास में आ रही बाधाओं की अचूक पहचान कर समन्वयवाद की राह पर आगे बढ़ते हुई उसके निदान का श्लाघनीय प्रयत्न किया. उनकी संपूर्ण काव्य साधना में यह सकारात्मक और सृजनात्मक भाव सर्वत्र प्रतिबिंबित है. तुलसी ने यह कार्य बिना किसी का विरोध किए हुए, सर्वजन हिताय की भावना से किया. यही कारण है कि शताब्दियां बीत जाने के बाद भी तुलसी हमारे लिए आज भी प्रासंगिक हैं. डॉ सतीश कुमार सिंह ने कहा कि जाति-भेद और संप्रदाय-भेद से जर्जरीभूत समाज में जन्म लेने वाले तुलसीदास को भी इसका तीखा दंश झेलना पड़ा था. इसका वर्णन उन्होंने “कवितावली ” के अनेक पदों में अत्यंत मार्मिकता के साथ किया है, लेकिन इस विष को अंगीकार कर उन्होंने समाज को रामचरितमानस एवं अन्य कृति के रूप में अमृत का दान किया. कहा कि तुलसी ने समाज में प्रचलित रूढ़ियों और संकीर्णताओं के आगे राम जैसे आदर्श के रूप में बड़ी लकीर खींचकर सौमनस्य की नई राह दिखाई. तुलसी और उनके आराध्य राम दोनों का युग राजतंत्र का था. बावजूद उन्होंने “जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी, सो नृप अवसि नरक अधिकारी ” का उद्घोष कर जनतांत्रिक मूल्य का ऐसा संदेश दिया, जो आज के नीति नियंताओं के लिए कसौटी बना हुआ है. डॉ अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि तुलसी ने जन-जन तक राम की महिमा और अपना संदेश पहुंचाने के लिए देव भाषा संस्कृत को छोड़ जनभाषा अवधी और ब्रजभाषा को अपनी रचना का माध्यम बनाया. यही कारण है कि उनकी कृतियां समय की सीमा को लांघकर सार्वकालिक और सार्वजनीन बन गई. संचालन डॉ ज्वाला चन्द्र चौधरी, धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुप्रिता शालिनी ने किया. मौके पर डॉ अमरकांत कुमर, डॉ मीना कुमारी, डॉ माला कुमारी, डॉ अरुण कुमार ठाकुर, डॉ चंद्रनाथ मिश्र, डॉ ममता रानी ठाकुर, सुधीर कुमार मिश्र, डॉ शत्रुघ्न मिश्र, डॉ जेबा परवीन, सुमन पोद्दार, डॉ सुबोध कुमार यादव, नरेंद्र कुमार नीरज, प्रतिभा कुमारी, चांदनी कुमारी, सोनू कुमार आदि मौजूद रहे. इससे पूर्व संगीत विभाग की छात्रा प्रतिभा ने तुलसीदास के पद “जब जानकीनाथ सहाय भये ” का सुमधुर गायन प्रस्तुत की.
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