Darbhanga New : धू-धूकर जली बुराई का प्रतीक होलिका, रंगों का त्योहार होली कल

Updated at : 13 Mar 2025 10:39 PM (IST)
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Darbhanga New : धू-धूकर जली बुराई का प्रतीक होलिका, रंगों का त्योहार होली कल

Darbhanga New :होली के आनंद में पूरा समाज डूब गया है. रंग-गुलाल से चेहरे सराबोर नजर आ रहे हैं.

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Darbhanga New : दरभंगा. होली के आनंद में पूरा समाज डूब गया है. रंग-गुलाल से चेहरे सराबोर नजर आ रहे हैं. गुरुवार को होलिका दहन के साथ उमंग का यह त्योहार आरंभ हो गया है. हालांकि रंगों का त्योहार होली इस बार परंपरा के अनुरूप होलिका दहन के ठीक अगले दिन नहीं होगा. तिथि को लेकर परंपरा में परिवर्तन हो रहा है. इसके अनुसार होलिका दहन के बाद त्योहार 14 मार्च की जगह 15 मार्च को होगा. वैसे लोगों ने 14 तथा 15 मार्च अर्थात दोनों दिन जमकर होली खेलने की तैयारी कर रखी है. वैसे वसंत पंचमी से ही मिथिला में रंग-गुलाल उड़ने लगते हैं. मेहमानों के आतिथ्य सत्कार के साथ खुशियों के रंग से उनका जीवन रंगीन रखने की कामना के साथ यहां रंग-गुलाल भी दिये जाने की परंपरा है. लेकिन, इस बार होलिका दहन के बाद होली के त्योहार का उमंग दो दिन शुक्रवार व शनिवार को देखने को मिलेगा. इसे लेकर युवाओं व बच्चों का उत्साह चरम पर है. गुरुवार की घरों में बड़ी-कढी के साथ तरुआ आदि पकाए गये. होलिका में अर्पण के लिए बड़ी निकाली गई. भोजन आदि से निवृत्त होकर लोग टोलियों में होलिका दहन के लिए निकले. डंफा, करताल, झाल के ताल पर सुर मिलाते हुए सभी पारंपरिक फाग गाते हुए निर्धारित स्थान पर पहुंचे. इसके बाद निर्धारित मुहुर्त में होलिका दहन किया. इस बार केवल नगर क्षेत्र में 150 से अधिक जगह पर होलिका जलाने की तैयारी स्थानीय लोगों ने मोहल्ला स्तर पर रखी थी. जानकारी के अनुसार लोहिया चौक, खाजासराय चौक, चट्टी चौक, बेंता, अललपट्टी, दोनार, दरभंगा रेलवे स्टेशन चौक, शास्त्री चौक, मदारपुर चौक, नाका नंबर पांच, छह, दो, तीन, एक, मिर्जापुर चौक, हसन चक, आजमनगर, रहमगंज, शिवधारा चौक, सैदनगर, बाकरगंज, बेलवागंज, लहेरियासराय टावर, दारूभठ्ठी चौक, दरभंगा टावर, बेलामोड़, कंगवा रेलवे गुमटी चौक, मुगलपुरा, पंडासराय रेलवे गुमटी चौक, भठियारीसराय, चूनाभट्टी, लक्ष्मीसागर, बेला, कटहलबाड़ी, नगर निगम चौक, जेपी चौक, केएम टैंक, सीआइडी चौक, आयकर चौराहा,क्षजीएम रोड, मिश्रटोला, राजकुमार गंज, कादिराबाद चौक सहित अन्य त्रिमुहानी, चौक-चौराहा एवं सार्वजनिक स्थलों पर स्थानीय मोहल्लावासियों द्वारा होलिका जलायी गयी. बता दें कि शास्त्रीय विधान के मुताबिक होलिका दहन फागुन पूर्णिमा तिथि में होता है, जबकि होलिका भस्म क्रीड़ा के साथ हाेली चैत्र प्रतिपदा में खेलने का विधान है. पंडित विश्वनाथ शास्त्री बताते हैं कि 14 मार्च को दिन के 11.22 बजे तक पूर्णिमा तिथि है. इसके बाद प्रतिपदा आरंभ हो जायेगा, किंतु प्रतिपदा में सूर्योदय अगले दिन यानी शनिवार 15 मार्च को हो रहा है. इसलिए शास्त्री विधान के अनुसार होली 15 मार्च को होगी. साथ ही सप्तडोरा बंधन भी इसी दिन होगा. होली के दिन अपनों संग त्योहार मनाने के लिए तरह-तरह के मुखौटे, बिग, रंग, गुलाल, पिचकारी का प्रबंध जहां कर लिया गया है, वहीं पूआ-पूरी के साथ अन्य लजीज व्यंजन बनाने की भी तैयारी है. शाकाहारी जहां खीर, पनीर आदि का आनंद लेंगे, वहीं मांसाहारी खस्सी का मांस, चिकेन, मछली का मजा लेंगे. पारंपरिक होली गीतों के साथ उमंग छलक रहा है.

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